पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, बिहार द्वारा पटना के अधिवेशन भवन में एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता विभाग के प्रधान सचिव श्री एच. आर. श्रीनिवास ने की। इस मौके पर विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, जिला और अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे।
पुष्पगुच्छ भेंट कर हुआ स्वागत
प्रधान सचिव ने कर्नाटक राज्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ सरकार 2500 से अधिक छात्रावास चला रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार में भी छात्रावासों की संख्या बढ़ाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कल्याणकारी योजनाओं को ज़मीन तक पहुँचाने के लिए ‘बॉटम-अप अप्रोच’ यानी नीचे से ऊपर की कार्यशैली अपनाई जानी चाहिए।
कन्या आवासीय विद्यालयों की समीक्षा
बैठक में प्रधान सचिव ने अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सभी अनुमंडल स्तर के कल्याण पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खुद गांवों, मोहल्लों और टोलों में जाकर छात्राओं को नामांकन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने यह स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में इन विद्यालयों में सीटें खाली नहीं रहनी चाहिए और स्कूल अपनी पूरी क्षमता से संचालित होने चाहिए। भवन निर्माण कार्य की स्थिति की भी जिलावार समीक्षा की गई और संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
छात्रावासों की स्थिति पर फोकस
जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावासों और अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रावासों की स्थिति भी समीक्षा का एक अहम हिस्सा रही। प्रधान सचिव ने मधुबनी, बांका, किशनगंज जैसे जिलों में छात्रावास भवनों की स्थिति पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि भवन निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। इसके अलावा उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भवनों में जो मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं, उनके गारंटी से संबंधित कागजात भी संबंधित अधिकारी उपलब्ध कराएं।
छात्रवृत्ति योजनाओं की गहन समीक्षा
बैठक में छात्रवृत्ति योजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की समीक्षा के साथ-साथ प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान में हो रही देरी पर चर्चा की गई। इसमें पाया गया कि कटिहार जिले में 1672 और मधेपुरा में 1513 छात्रों का भुगतान अब तक लंबित है। इस पर प्रधान सचिव ने निर्देश दिया कि इन लंबित मामलों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि छात्र किसी भी तरह की असुविधा से बच सकें।
उपयोगिता प्रमाण पत्रों में देरी पर चिंता
विभाग द्वारा अब तक खर्च की गई राशियों के उपयोगिता प्रमाण पत्रों की समीक्षा करते हुए प्रधान सचिव ने पाया कि सीतामढ़ी जिले में लगभग 4898 लाख रुपये के प्रमाण पत्र अब तक लंबित हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जहां भी कार्य पूर्ण हो चुका है, वहां का हिसाब-किताब तुरंत भेजा जाए ताकि विभागीय प्रक्रियाएं बाधित न हों।
अन्य योजनाओं की भी समीक्षा
समीक्षा बैठक में अन्य कई योजनाओं पर भी चर्चा की गई। इनमें छात्रावासों में खाद्यान्न आपूर्ति की स्थिति, मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना, एसी/डीसी के लंबित मामलों की स्थिति, कैडर मैपिंग, ई-सर्विस बुक की प्रगति, प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र, मुख्यमंत्री व्यावसायिक मार्गदर्शन योजना, उत्प्रेरण योजना और कौशल विकास योजना शामिल हैं। प्रधान सचिव ने इन सभी योजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
बड़ी संख्या में अधिकारी रहे मौजूद
इस बैठक में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमंडलीय उप निदेशक, जिला स्तर और अनुमंडल स्तर के कल्याण पदाधिकारी उपस्थित रहे। विभाग की ओर से अपर सचिव, उप सचिव, विशेष कार्य पदाधिकारी और अन्य कर्मी भी बैठक में शामिल हुए।
भविष्य की योजना