दीक्षांत समरोह के बाद जश्न मनाते विद्यार्थी।
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विदेश मंत्री बोले- वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बने नई पीढ़ी
इस अवसर पर केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने नालंदा के अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते हुए यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बने। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से स्नातक होकर निकलने वाले छात्र विश्व भर में भारत के सांस्कृतिक दूत बनेंगे। उन्होंने ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि तकनीक और परंपरा का समन्वय ही भविष्य को सशक्त बनाएगा।
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जानिए बिहार के राज्यपाल ने क्या कहा ?
बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने विश्वविद्यालय को निरंतरता और नवीनीकरण का प्रतीक बताया, जो अतीत के वैभव को वर्तमान की आकांक्षाओं से जोड़ता है। वहीं, बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने नालंदा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे चरित्र निर्माण का केंद्र बताया। इधर, कार्यक्रम की शुरुआत में कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने LEAP (लर्न, अर्न और पायनियर) कार्यक्रम सहित विभिन्न शैक्षणिक पहलों की जानकारी दी। समारोह के अंत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से तैयार बोधिसत्व अवलोकितेश्वर की एक भव्य प्रतिकृति राष्ट्रपति को स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई।