पटना में अंतरराष्ट्रीय मेदांता कार्डियक कॉन्क्लेव 2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भारत, इंग्लैंड, अमेरिका, मॉरीशस और नेपाल के ख्यातिप्राप्त हृदय रोग विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक सत्रों और मास्टरक्लास के माध्यम से अपनी नवीनतम विशेषज्ञता साझा की। कार्डियोवास्कुलर और कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि हृदय रोग आज भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। हमारा उद्देश्य है कि बिहार और पूर्वी भारत के मरीजों को वही उपचार उपलब्ध हो, जो अमेरिका, यूरोप या दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े चिकित्सा केन्द्रों में मिलता है। कार्डियक कॉन्क्लेव इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, ताकि डॉक्टरों को नवीनतम तकनीकों का ज्ञान मिले और मरीजों को सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हों।
कॉन्क्लेव में इंग्लैंड से डॉ. जेम्स नोलान और डॉ. राजे नरायण, अमेरिका से डॉ. मिथिलेश दास तथा मॉरीशस से डॉ. शमलोल उमेश ने अपने प्रगति उन्मुख प्रस्तुतिकरण के माध्यम से हृदय रोग उपचार में उभरती नई दिशाओं पर प्रकाश डाला। इधर, भारत के विभिन्न प्रमुख शहरों, गुरुग्राम, नोएडा, लखनऊ, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, मुम्बई, अहमदाबाद, कोलकाता, रांची और गुवाहाटी से आए वरिष्ठ इंटरवेंशनल और क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्टों ने जटिल एंजियोप्लास्टी, हाई-रिस्क केस मैनेजमेंट, बिना तार वाले पेसमेकर, अतालता उपचार तथा बिना चीरा-फाड़ वाली हृदय प्रक्रियाओं पर अपनी तकनीकें साझा कीं।
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. प्रवीण चंद्रा ने कहा कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी लगातार विकसित हो रही है। आज हम ऐसे जटिल मामलों का सफलतापूर्वक उपचार कर पा रहे हैं, जिन्हें कुछ वर्ष पहले असंभव माना जाता था। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य है कि बिहार के चिकित्सक इन उन्नत तकनीकों को सीखें और अधिक से अधिक जीवन बचाए जा सकें। कार्डियोलॉजी विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. रजनीश कपूर ने कहा कि हार्ट अटैक के कई मरीज देरी से अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे समय में अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित टीम का संयोजन ही जीवन बचा सकता है। इस प्रकार के मास्टरक्लास बिहार में कार्डियक केयर को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उपचार देना नहीं, बल्कि बिहार को कार्डियोवस्कुलर साइंस का प्रमुख केन्द्र बनाना है। कार्यक्रम में डॉ. रवि शंकर सिंह, डॉ. अजय कुमार सिन्हा, डॉ. शाहीन अहमद, डॉ. विजय कुमार, डॉ. पवन कुमार सिंह सहित वैज्ञानिक और आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।