आरटीआई कार्यकर्ता ने शिवप्रकाश राय नियमों का हवाला देते हुए बताया, पटना हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट है कि सरकार उन लोगों पर ही बॉडीगार्ड के मद से पैसे खर्च कर सकती है, जो सामाजिक सरोकार से जुड़े हों या उनकी जान को खतरा हो। लेकिन कैग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत कई आपराधिक प्रवृत्ति और माफिया किस्म के लोगों को बॉडीगार्ड मुहैया कराए गए है और इसके बदले में कोई राशि नहीं वसूली गई है। आरटीआई कार्यकर्ता राय ने कहा कि अगर इस धनराशि की वसूली नहीं होती है, तो वह सरकार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
कई जिलों के अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
बॉडीगार्ड आवंटन में यह घोटाला वर्ष र्ष 2017 से लेकर 2021 के बीच किया गया है। कैग की इस रिपोर्ट के बारे में बिहार पुलिस मुख्यालय को भी जानकारी है। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई होने के बाद कई जिलों के डीएम और एसपी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। इन अधिकारियों पर आरोप है कि निजी स्वार्थ में इन्होंने सरकार के राजस्व का नुकसान कराया है।