Bihar Police : बिहार में रोज अलग-अलग तरह की घटनाएं होती रही हैं। इस वजह से बिहार के सभी थानों में फाइलों की अंबार लगी हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर अपराधियों को मिलता है। इसको लेकर बिहार के डीजीपी ने अब बड़ा फैसला लिया है।
बिहार की चरमराई कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और लंबित कांडों के बोझ को कम करने के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। वर्तमान पुलिस महानिदेशक विनय कुमार की विशेष पहल पर बिहार में पुलिस अंचलों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद अब राज्य में अंचलों की कुल संख्या 357 से बढ़कर 552 हो जाएगी।
150 केसों का बोझ अब होगा कम
बिहार पुलिस के इतिहास में इसे अब तक का सबसे महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। मुख्यालय का मानना है कि इस कदम से न केवल जांच की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय भी मिल सकेगा। वर्तमान में बिहार पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुकदमों का अंबार है। आंकड़ों के मुताबिक, अभी एक पुलिस इंस्पेक्टर के पास औसतन 100 से 150 केस लंबित रहते हैं। कार्यभार अधिक होने के कारण जांच में देरी होती है और अपराधी इसका फायदा उठाकर बच निकलते हैं।
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रेल पुलिस के ढांचे में भी आमूलचूल बदलाव
इस प्रशासनिक सुधार की खास बात यह है कि जिला पुलिस के साथ-साथ रेल पुलिस को भी मजबूत किया गया है। पटना, मुजफ्फरपुर और जमालपुर रेल पुलिस के अंतर्गत नए अंचल बनाने से ट्रेनों और स्टेशनों पर होने वाले अपराधों की जांच अब ज्यादा गहनता से हो सकेगी। यात्रियों की सुरक्षा और उनके द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पीड़ितों को न्याय और अपराधियों पर नकेल
पुलिस मुख्यालय की इस पहल से उन हजारों पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण जगी है, जिनके केस वर्षों से फाइलों में दबे हुए हैं। संसाधनों और मैनपावर की कमी का बहाना अब नहीं चलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर अनुसंधान से कोर्ट में पुलिस का पक्ष मजबूत होगा, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने की दर (Conviction Rate) में सुधार आएगा।