Hijab Controversy : हिजाब हटाने को लेकर सुर्ख़ियों में बनी नुसरत प्रवीण ने आखिरकार 6 जनवरी को अपना योगदान कर ही लिया है। इस बात की पुष्टि सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने की, लेकिन कैमरा के सामने नहीं आए।
बिहार में पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बनीं नुसरत प्रवीण ने आखिरकार अपनी नई नौकरी ज्वाइन कर ली है। इस खबर की आधिकारिक पुष्टि जिला सिविल सर्जन द्वारा की गई है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि नुसरत प्रवीण की नियुक्ति से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि 6 जनवरी को नुसरत प्रवीण का मेडिकल चेकअप किया गया। मेडिकल रिपोर्ट फिट आने के बाद, उन्होंने 6 जनवरी को उन्होंने अपना योगदान दिया है। सिविल सर्जन डाॅ. अविनाश कुमार ने बताया कि 6 जनवरी को उन्होंने अपना योगदान दिया और फिर उनकी पोस्टिंग सदर पीएचसी में की गई है। ज्वाइनिंग का 7 जनवरी को आखिरी दिन था।
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शुरू हो गई थीं तरह-तरह की चर्चाएं
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया और ज्वाइनिंग को लेकर जब मीडिया ने सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार सिंह से विस्तार से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने केवल मौखिक रूप से ज्वाइनिंग की पुष्टि की है। विदित हो कि नुसरत प्रवीण की ज्वाइनिंग को लेकर पिछले कई दिनों से कयासों का दौर जारी था। अब आधिकारिक ज्वाइनिंग के बाद इन कयासों पर विराम लग गया है। नुसरत की जॉइनिंग को लेकर शुरुआत से ही गहमागहमी का माहौल था। बीच में कॉलेज के प्रिंसिपल और उनकी एक क्लासमेट ने मजबूती से दावा किया था कि वह सदर अस्पताल में योगदान देने वाली हैं। हालांकि, उस तय दिन पर नुसरत अस्पताल नहीं पहुंचीं, जिसके बाद स्वास्थ्य महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
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दो बार बढ़ानी पड़ी योगदान करने की डेडलाइन
दरअसल इस बैच के चिकित्सकों के लिए जॉइनिंग की प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। जॉइनिंग की शुरुआती अंतिम तिथि 20 दिसंबर तय की गई थी। फिर हिजाब मामले को लेकर हुए हंगामें के बाद इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर किया गया, लेकिन तब भी आयुष चिकित्सक नुसरत ने योगदान नहीं दिया। तब स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम अवसर के तौर पर 7 जनवरी तक का समय दिया था।
63 साथी पहले ही संभाल चुके हैं कमान
हैरानी की बात यह रही कि नुसरत के ही बैच के 63 अन्य आयुष चिकित्सक काफी समय पहले ही आवंटित स्थानों पर अपना योगदान देकर काम शुरू कर चुके हैं। अकेले नुसरत के योगदान नहीं होने से प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे थे। लेकिन बुधवार को, यानी आखिरी तिथि की शाम तक उन्होंने विभाग पहुंचकर ज्वाइन कर लिया। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि योगदान करने की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है।