वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त का इंतजार कर रही खगड़िया के रामपुर गोगरी गांव की अमीना खातून को आखिरकार बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम की मदद से न्याय मिल गया है। बैंक की गलती से किसी और के खाते में ट्रांसफर हुई राशि को अब सुधार कर लाभार्थी के खाते में भेज दिया गया है।
अमीना खातून, पति मोहम्मद राशिद, को मकान निर्माण के लिए योजना की राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन गलती से वह राशि पूर्व ऋणधारी के खाते में चली गई थी और बैंक ने उसे पुराने कर्ज की वसूली में समायोजित कर लिया। ब्लॉक कार्यालय से मकान निर्माण पूरा करने के निर्देश के बाद जब अमीना को पता चला कि उन्हें कोई राशि ही नहीं मिली, तो उन्होंने जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
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शिकायत पर नोटिस जारी
शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए डीपीजीआरओ खगड़िया ने संबंधित लीड बैंक मैनेजर और प्रखंड विकास पदाधिकारी गोगरी को नोटिस जारी किया। सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक की लापरवाही से योजना राशि गलत खाते में गई और कर्ज वसूली में कट गई। जिला लोक शिकायत पदाधिकारी ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए बैंक को तत्काल वास्तविक लाभार्थी के खाते में पूरी राशि स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
प्रशासन का जताया आभार
बैंक मुख्यालय से अनुमति मिलने के बाद राशि अमीना खातून के खाते में अंततः जमा कर दी गई। वर्षों के इंतजार के बाद योजना का लाभ मिलने पर अमीना ने प्रशासन का आभार जताया और कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिनियम जैसे प्रावधान गरीबों के लिए बड़ा सहारा हैं। गौरतलब है कि बिहार सरकार का यह अधिनियम 5 जून 2016 से लागू है, जिसके तहत 60 कार्य दिवसों में शिकायतों के निष्पादन का प्रावधान है। सरकार इसे “न्याय के साथ विकास” के विजन से जोड़कर देख रही है। इस मामले ने साबित किया है कि यदि आमजन सजग रहें तो सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।