समस्तीपुर शहर के ओवरब्रिज के पास शनिवार को यातायात पुलिस की बदसलूकी से नाराज अधिवक्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। घटना पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप के साथ हुई, जब यातायात पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इसके विरोध में समस्तीपुर व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता सड़क पर उतर आए। फिर यातायात पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए समस्तीपुर-पटना मार्ग को जाम कर दिया।
बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। यातायात डीएसपी आशीष राज और नगर थाना अध्यक्ष शिवकुमार यादव मौके पर पहुंचे। फिर अधिवक्ताओं को समझा-बुझाकर सड़क जाम खत्म कराया। हालांकि, अधिवक्ता ऑन-ड्यूटी यातायात पदाधिकारी संतोष कुमार पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
क्या है पूरा मामला?
घटना के संबंध में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने बताया कि वह पटना से अपनी कार से समस्तीपुर कोर्ट पहुंचे थे। ओवरब्रिज के पास से कोर्ट की ओर मुड़ने के दौरान उनकी यातायात पुलिस के एक पदाधिकारी से कहासुनी हो गई। इसके बाद पुलिस पदाधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, गाली-गलौज की और हाथापाई तक कर दी।
जब यह खबर समस्तीपुर व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं तक पहुंची, तो वे गुस्से में आ गए और कोर्ट परिसर से निकलकर ओवरब्रिज पर हंगामा शुरू कर दिया। नाराज अधिवक्ताओं ने समस्तीपुर-पटना मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया और यातायात पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस बिना किसी कारण वकीलों के साथ दुव्यर्वहार करती है और दोषी अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सड़क जाम से राहगीरों को हुई परेशानी
अधिवक्ताओं द्वारा सड़क जाम करने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस कारण राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच सके। कुछ लोग पैदल ही अपने रास्ते की ओर बढ़ते नजर आए। हालांकि, यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को काबू में किया और अधिवक्ताओं से बातचीत कर उन्हें सड़क से हटाया।
पुलिस प्रशासन ने क्या कहा?
यातायात डीएसपी आशीष राज ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि थोड़ी समस्या आई थी, जिसे सुलझा लिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस अधिवक्ताओं के सम्मान को लेकर हमेशा संवेदनशील रहती है और इस मामले की जांच कर उचित कदम उठाए जाएंगे। इस घटना के बाद वकीलों में आक्रोश बना हुआ है। अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर दोषी यातायात पदाधिकारी के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे भी बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।