यह लोग बिना किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री रह चुके हैं।
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जानिए कौन बिना किसी सदन के सदस्य बने ही मंत्री बना दिए गए
- बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी जब पहली बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं तब वह किसी भी सदन की सदस्य नहीं थी। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद जब जेल गए थे तब रातों-रात राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया गया था और 25 जुलाई 1997 को वह पहली बार बिहार की मुख्यमंत्री बनी। बाद में उन्हें विधान परिषद भेजा गया।
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी पांच महीने 28 दिन तक किसी भी सदन के सदस्य बने बिना ही मंत्री पद पर आसीन रहे थे। बाद में उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर सदन की सदस्यता प्राप्त कर ली थी। एक दिन पहले सीएम सम्राट ने खुद इस बात की जानकारी दी।
- स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सात मई को मंत्री पद की शपथ ली थी तो वह किसी सदन के सदस्य नहीं थे। हालांकि, 11 जून 2026 को वह निर्विरोध विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हो गए। वह एक महीने से अधिक समय तक बिना सदस्यता के मंत्री रहे और फिर सदन के सदस्य बन गए।
- वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख दीपक ने 7 मई 2026 को पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली। वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। अब तक वह 37 दिन मंत्री पद पर रह चुके हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, वह 6 नवंबर 2026 तक किसी एक सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी, अन्यथा मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।
क्या कहता है संविधान का नियम?
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) कहता है, कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में शपथ ले सकता है, भले ही वह उस समय विधानसभा या विधान परिषद् का सदस्य न हो। लेकिन शर्त यह है कि उसे शपथ ग्रहण की तिथि से छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। यदि वह छह महीने की अवधि के भीतर सदस्यता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो वह स्वतः मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है और उसे पद छोड़ना पड़ता है।