राजद नेता तेजस्वी यादव ने झारखंड विधानसभा के परिणामों को लेकर कहा कि हमने झारखंड में 4 सीटें जीती हैं और एक या दो सीटें बहुत कम अंतर से हारे हैं। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने भारी बहुमत के साथ यहां जीत दर्ज कराई है। हम उन्हें भी धन्यवाद देते हैं।
उन्होंने कहा कि जहां तक बिहार उपचुनाव का सवाल है, हमने सभी चार सीटें जीती हैं, जिन पर चुनाव हुआ था। 2024 का उपचुनाव हम हार गए, 2025 में हम ही जीतेंगे। उन्होंने कहा कि चुनावों में हार-जीत चलती रहती है। झारखंड के बाद बिहार की बारी है। यहां महागठबंधन की सरकार बनना तय है। इसके लिए हम पूरी तरह कोशिश करेंगे कि किसी भी कीमत पर बिहार में एनडीए की सरकार नहीं बने।
इधर बिहार के उपचुनाव में इंडिया गठबंधन के अनुकूल परिणाम नहीं आने पर राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि उपचुनावों में परिणाम अक्सर सत्ताधारी दल के पक्ष में ही जाता है। चूंकी इससे सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं होता इसलिए मतदाताओं का झुकाव सत्ताधारी दलों की ओर ज्यादा रहता है। सरकार द्वारा इंडिया गठबंधन को हराने के लिए सारी ताकत लगा दी गई थी जबकि राजद का ध्यान मुख्य रूप से झारखंड विधानसभा के चुनावों पर केंद्रित था।
उन्होंने कहा कि हमारे नेता झारखंड में ही कैम्प किए हुए थे, जहां हमें और इंडिया गठबंधन को शानदार सफलता मिली है। इस चुनाव में यह भी स्पष्ट हो गया कि तेजस्वी जी की लोकप्रियता और स्वीकार्यता न केवल बिहार में है बल्कि झारखंड में भी उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता बढ़ी है। जो लोग इसे सेमीफाइनल बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, उन पर हंसा ही जा सकता है।
विधानसभा का आम चुनाव सरकार बनाने के लिए होता है, उसके मुद्दे अलग होते हैं। उपचुनावों को यदि बिहार विधानसभा के लिए सेमीफाइनल ही मानना है तो हम झारखंड विधानसभा के चुनाव परिणाम को बिहार विधानसभा के होने वाले चुनाव का सेमीफाइनल मान सकते हैं।
वैसे भी झारखंड पहले बिहार का ही अंग था और दोनों राज्यों के मतदाताओं के मन-मिजाज में काफी समानता है। जिस प्रकार झारखंड में साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने वालों को बैरंग लौटा दिया गया है, उसी तरह आगे आने वाले विधानसभा चुनाव में बिहार से भी एनडीए का सफाया हो जाएगा।