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KK Pathak: राज्यपाल के समर्थन में उतरा ABVP, केके पाठक के खिलाफ केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठी में खोला चिट्ठा

Tue, 23 Apr 2024 07:34 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News: एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि बिहार के विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता में अपर मुख्य शिक्षा सचिव का गैरजरूरी हस्तक्षेप है। वहीं, बिहार के विश्वविद्यालयों के अकाउंट फ्रीज किए जाने पर एबीवीपी ने भारत सरकार के कैबिनेट सचिव को ज्ञापन भेजा है।
 
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एसीएस केके पाठक और राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर के बीच जारी तनातनी के बाद एबीवीपी की एंट्री हो गई है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बिहार के राज्यपाल के समर्थन में उतर गया है। इसके साथ ही ABVP ने अपर मुख्य शिक्षा सचिव केके पाठक के खिलाफ केंद्र सरकार को एक चिट्ठी लिखी है। उसमें एबीवीपी ने बिहार के विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता में एसीएस केके पाठक के लगातार गैरजरूरी हस्तक्षेप, विश्वविद्यालयों के अकाउंट फ्रीज करने से उत्पन्न हुए वित्तीय संकट और प्रशासनिक कार्यों पर उसके कुप्रभाव, उच्च शिक्षण संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियों से उत्पन्न हुई समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए भारत सरकार के कैबिनेट सचिव राजीव गौबा कार्रवाई की मांग की है।

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एबीवीपी ने लगाए गंभीर आरोप
केंद्र सरकार को लिखी गई चिट्ठी में कहा गया है कि बिहार शिक्षा विभाग द्वारा विश्वविद्यालयों के अकाउंट फ्रीज करने से पूरे बिहार के उच्च शिक्षण संस्थान बीते तीन महीने से गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। इसका दुष्परिणाम बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र पर पड़ रहा है। साथ ही बिहार राज्य के अपर मुख्य सचिव केके पाठक द्वारा लगातार विश्वविद्यालयों के निर्णयों में गैरजरूरी हस्तक्षेप से अकादमिक और प्रशासनिक संकट उत्पन्न हो गया है। विश्वविद्यालयों के अकाउंट फ्रीज होने से 3,500 प्राध्यापक, 2,800 शिक्षकेत्तर कर्मचारी, 3,000 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापक, 1,400 अतिथि प्राध्यापक और 2,500 संविदा कर्मचारियों को वेतन तथा पेंशन नहीं मिलने से, उनके समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न हो रही है।

'26 लाख से अधिक विद्यार्थियों का बिगड़ रहा भविष्य'
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि यह अत्यंत दुखद और शर्मनाक है कि बिहार के अपर मुख्य शिक्षा सचिव के अड़ियल रवैए के कारण विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों की स्थिति पूरी तरह से चरमराई हुई है। एसीएस का राजभवन से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक टकराव शिक्षा क्षेत्र के हितों को प्रभावित कर रहा है। शिक्षा विभाग के अड़ियल रवैए से बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अध्ययनरत लगभग 26 लाख से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य बिगड़ रहा है। विद्यार्थी परिषद, कैबिनेट सचिव से बिहार शिक्षा क्षेत्र के हित में शीघ्र कार्रवाई की मांग करती है।

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