बकरीद में बढ़ी बाजार की रौनक
- फोटो : अमर उजाला
इस संबंध में मौलाना का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग फजर की नमाज से लेकर मगरिब के अज़ान तक रोज रोजा खोलते हैं। यह महीना पाक महीना माना जाता है। इस पूरे महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। इनकी मान्यता के अनुसार खाने-पीने से परहेज़ करना होता है। बुरे कामों और बुरी बातों से दूर रहना होता है तथा धैर्य और संयम का अभ्यास करना होता है। इस महीने में नमाज़, कुरआन की तिलावत, तरावीह और दुआओं का खास महत्व होता है। माना जाता है कि इस महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
यह खबर भी पढ़ें-Fake Certificate: आपकी नकली डिग्री का सब पता है... नीतीश कुमार के मंत्री पर राजद का हमला, जवाब में मिली चुनौती
इस संबंध में मौलाना कहते हैं कि इसी महीने कुरआन इस दुनिया में आया था, इसलिए इस महीने को बेहद पाक महीना कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मुस्लिमों के लिए जिस तरह नमाज पढ़ना अनिवार्य है, ठीक उसी तरह दिन में रोजा रखना और रात में इबादत करना हमारा फर्ज है। रमजान हमें यह सिखाता है कि हमें आपस में भाईचारा, प्यार और दिल में त्याग की भावना रखनी चाहिए। रमजान रहमत और बरकत का महीना है। कहा जाता है कि इस महीने में बच्चे, बूढ़े, महिला और पुरुष सभी को रोका रखना अनिवार्य है, सिर्फ बीमार लोगों को ही रोजा रखने की छुट दी गई है।