वित्तीय वर्ष 2017-18 से लगातार कारोबार करने के बावजूद सरकार को शून्य नकद टैक्स दिखाने और बिना जीएसटी निबंधन के व्यापार करने वालों पर वाणिज्य कर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विभाग ने जिले में ऐसे 400 कारोबारियों की पहचान कर उन्हें विधिवत नोटिस जारी किया है। कार्रवाई के बाद चालू महीने में अब तक 17 लाख रुपये का नकद टैक्स जमा कराया जा चुका है।
दवा, कपड़ा और हार्डवेयर कारोबारी जांच के दायरे में
विभाग की जांच में मुख्य रूप से दवा के थोक और खुदरा विक्रेता, कपड़ा कारोबारी, हार्डवेयर व सैनिटरी सामान के व्यापारी, लकड़ी और फर्नीचर कारोबारी, किराना तथा खाद्यान्न व्यवसायी शामिल हैं। जीएसटीएन के आंकड़ों के अनुसार, शून्य नकद टैक्स दिखाने वाले कारोबारियों का अनुपात बिहार में देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक बताया गया है। इस मुद्दे पर 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली जीएसटीएन की उच्चस्तरीय बैठक में भी समीक्षा की जानी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय पर टैक्स जमा नहीं करने वालों से बकाया राशि की वसूली ब्याज और जुर्माने के साथ की जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष अभियान
मुख्यमंत्री की हालिया समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद बिना निबंधन कारोबार करने वालों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। नालंदा अंचल स्तर पर राज्य कर उपायुक्त पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई है।
यह टीम अलग-अलग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करेगी और मौके पर जाकर उनके कारोबार का भौतिक सत्यापन भी करेगी। जांच के दौरान निबंधन, कारोबार और टैक्स भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जाएगी।
20 लाख से ज्यादा किराया आय वाले मकान मालिक भी जांच में
वाणिज्य कर विभाग ने व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अपनी संपत्ति किराए पर देने वाले मकान मालिकों को भी जांच के दायरे में लिया है। सालाना 20 लाख रुपये से अधिक किराया आय अर्जित करने वाले भू-स्वामियों को जीएसटी निबंधन के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा किराए पर लागू रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत टैक्स जमा नहीं करने वाले कारोबारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि बड़ी संख्या में कारोबारी इस मद में टैक्स का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
साइनबोर्ड पर GSTIN नहीं लगाया तो 50 हजार तक जुर्माना
विभाग ने सभी पंजीकृत दुकानदारों और कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठान के साइनबोर्ड पर जीएसटी पहचान संख्या यानी GSTIN अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। निरीक्षण के दौरान साइनबोर्ड पर GSTIN नहीं मिलने पर जीएसटी अधिनियम की धारा 125 के तहत 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वाणिज्य कर विभाग ने कारोबारियों से समय पर नियमानुसार टैक्स जमा करने और जरूरी निबंधन पूरा कराने की अपील की है, ताकि उन्हें ब्याज, जुर्माने और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।