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Bihar: जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू परिवार पर आरोप तय, फैसले के फैसले पर जानें NDA नेताओं ने क्या कहा?

Fri, 09 Jan 2026 02:11 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

जमीन के बदले नौकरी मामले में दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
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बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत द्वारा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, बेटी मीसा भारती सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। इस अदालती आदेश का बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए नेताओं ने स्वागत किया है, जबकि राजद ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्रालय का इस्तेमाल निजी जागीर की तरह किया और एक आपराधिक साजिश के तहत सरकारी नौकरियों को जमीन हासिल करने के सौदे के रूप में प्रयोग किया। अदालत के अनुसार, इस पूरे मामले में रेलवे अधिकारियों और करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से यादव परिवार को लाभ पहुंचाया गया।

पटना में मीडिया से बात करते हुए जदयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि लालू यादव का परिवार एक राजनीतिक-आपराधिक सिंडिकेट की तरह काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से उम्मीद है कि इस मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाएगी और अवैध संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब्त की गई संपत्तियों पर अनाथालय, विधवा आश्रम और अति पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रावास बनाए जाने चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि राजनीति अपराध और कारोबार का जरिया नहीं हो सकती।

वहीं बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार को अदालत के आदेशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला और सबूतों के आधार पर ही अदालत ने यह फैसला दिया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी लालू परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजनीति का इस्तेमाल भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति जमा करने के लिए किया गया। साथ ही मांग की कि लालू परिवार की विदेशी संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए।

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दूसरी ओर, राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन राजनीतिक प्रतिशोध के तहत इसे दोबारा खोला गया। राजद का दावा है कि भाजपा राजनीतिक रूप से मुकाबला नहीं कर पा रही है, इसलिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

इधर, बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि लालू यादव परिवार के गुनाहों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून सबसे बड़ा है और भ्रष्टाचार करने वालों तक कानून जरूर पहुंचता है। सरावगी ने कहा कि अदालत ने भी माना है कि जमीन के बदले नौकरी का मामला एक व्यापक आपराधिक साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद के 15 साल के शासनकाल, जिसे उन्होंने ‘जंगलराज’ बताया, में बिहार में कई बड़े घोटाले हुए, जिनसे हजारों करोड़ रुपये लालू परिवार के पास पहुंचे और राज्य का विकास बाधित हुआ। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव द्वारा किया गया कथित घोटाला देशव्यापी स्तर का था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लालू परिवार की वजह से बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी झेलनी पड़ी और जनता यह अच्छी तरह समझती है कि विकास न होने और राज्य की छवि खराब होने के पीछे राजद शासन जिम्मेदार रहा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि लालू यादव पहले ही चारा घोटाले में सजा पा चुके हैं।

अदालत की टिप्पणी का हवाला देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि लालू यादव का पूरा परिवार राजनीति को अवैध संपत्ति बनाने के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है और बिहार की गरीब जनता को लूटने का काम किया गया। भाजपा का दावा है कि बिहार की जनता अब ऐसे भ्रष्टाचार और ‘जंगलराज’ की राजनीति को दोबारा बर्दाश्त नहीं करेगी।

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