बिहार की साइबर विंग ने भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (भारत सरकार) के सहयोग से एक बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बिहार के एक जदयू नेता हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसके खाते में 7 करोड़, घर में 1500 सिम कार्ड और कई लैपटॉप बरामद हुआ था। बताया जाता है कि वह सिम बॉक्स के माध्यम से देशव्यापी धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का वह मुख्य सरगना है। यह कार्रवाई सुपौल, वैशाली और अन्य जिलों में की गई, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय संबंधों वाले एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
घर से 1500 सीम की हुई थी बरामदगी
इस संबंध में जांच टीम का कहना है कि जांच के दौरान हर्षित कुमार के घर से लगभग 1500 सिम बरामद हुआ। उन सीम की जांच हुई तब बात सामने आई कि इन सिम बॉक्सों के माध्यम से 10,000 से अधिक फर्जी कॉल एक दिन में ही किए जाते थे। इन सिम से विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध किये जाते थे, जिससे भारत सरकार के दूरसंचार विभाग को भारी राजस्व की क्षति हो रही थी जिसका आंकलन किया जा रहा है।
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जानिए सिम का क्या था खेल
सिम बॉक्स चलाने के लिए बड़ी संख्या में अवैध सिम कार्ड की आवश्यकता थी। हर्षित ने इसके लिए पाकुड़, झारखंड के सुमित शाह नामक अपराधी से संपर्क किया। सुमित शाह, मार्च महीने से हर्षित को लगभग 1000 सिम कार्ड की आपूर्ति कर चुका था। सुमित शाह स्वयं सुल्तान नामक व्यक्ति से सिम कार्ड लेता था और सुल्तान ने हर्षित को लगभग 400 SIM कार्ड उपलब्ध कराए थे। हर्षित और सुल्तान की मुलाकात हाजीपुर में कई बार हुई थी।
ऐसे उपलब्ध किया था सिम
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सिम सप्लायर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ मिलीभगत करते थे। गिरफ्तार मोहम्मद सुल्तान एक कॉमन सर्विस सेंटर का संचालक है। वह कई फर्जी सरकारी योजनाओं में लाभार्थी बनाने का झांसा देकर, गांव गांव में कैंप लगाता था एवं आम जनता का बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा करता था। बायोमेट्रिक डेटा का टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के पंजीकृत डिस्ट्रीब्यूटर एवं रिटेलर्स से मिलीभगत कर आम व्यक्तियों की बायोमेट्रिक पहचान के आधार पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड हासिल करते थे और तत्पश्चात इन सिम कार्ड का उपयोग सिम बॉक्स के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।
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अब तक इनकी हो चुकी है गिरफ्तारियां
इस मामले में मुख्य सरगना जदयू नेता हर्षित कुमार और सीएससी संचालक मोहम्मद सुल्तान सहित कुल छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें चार पॉइंट ऑफ सेल संचालनकर्ता भी शामिल हैं। सुमित शाह की गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले अंतर्गत रामपुर हाट रेलवे स्टेशन से की गई है। पूछताछ के दौरान अन्य सीएससी संचालकों, टीएसपी डिस्ट्रीब्यूटर्स की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान अन्य संदिग्धों और ठिकानों का भी पता चला है जिस पर छापामारी की जा रही है।
जानिए कहाँ से जुड़ा है मामला
अभी तक के विश्लेषण में इस गिरोह के उद्भेदन से NCRP पोर्टल पर प्रतिवेदित देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 18 मामलों में संलिप्तता पाई गई है और इसकी संख्या में आगे बढ़ोत्तरी होने की प्रबल संभावना है। इस गिरोह के तार पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गोआ, कर्नाटक, दिल्ली, उड़ीसा, झारखंड राज्यों एवं यूएई, कम्बोडिया, थायलैंड, होंगकोंग, चीन, वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी इत्यादि से जुड़ा होना पाया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पैन, बैंक खातों और आधार विवरण एकत्र किये जा रहे हैं।
जानिए हर्षित कुमार का कंबोडिया, थाईलैंड, चीन और वियतनाम से कैसा है संबंध
जांच में सामने आया कि हर्षित कुमार (21) इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड है। वह फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से चीनी, वियतनाम, कंबोडिया एवं अन्य देश के नागरिकों के संपर्क में आया और उनके टेलीग्राम ग्रुप में शामिल हो गया। इन सरगनाओं ने उसे सिम बॉक्स चलाने के लिए पैसे का लालच दिया। हर्षित ने वियतनाम से 4 और चीन से 4 सिम बॉक्स डिवाइस प्राप्त किए। इन sim box के माध्यम से इस गिरोह के द्वारा एक समानांतर एक्सचेंज का संचालन किया जा रहा था, जिसमें कंबोडिया, थाईलैंड, एवं अन्य देशों में अवस्थित साइबर स्कैम के अड्डों से साइबर धोखाधड़ी एवं फ्रॉड के लिए प्रारंभ हो रही VOIP calls को लोकल जीएसएम कॉल्स में अवैध रूप से रूपांतरण कर देश के विभिन्न हिस्सों के नागरिकों से साइबर धोखाधड़ी की जा रही थी।