आईपीएस अधिकारी विकास वैभव
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इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मिथिलांचल, मगध, अंग, भोजपुरी एवं पूर्वांचल और सीमांचल की भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। सावन क्वीन, सावन प्रिंसेस और नन्ही परी प्रतियोगिताओं के माध्यम से महिलाओं की बुद्धिमत्ता, संवेदनशीलता एवं वक्तृत्व क्षमता का समन्वित प्रदर्शन देखने को मिला। गार्गी सावन क्वीन का खिताब माधुरी सिंह को मिला। नीतू कुमारी गार्गी सावन प्रिंसेस बनी और आर्या अंशुमान को गार्गी नन्ही परी का सम्मान मिला।
हरियाली तीज के अवसर पर महिलाओं द्वारा प्रस्तुत विशेष सांस्कृतिक प्रदर्शनों ने प्रकृति से जुड़ाव और पारंपरिक सौंदर्य को भली-भांति अभिव्यक्त किया। विभिन्न जिलों से आई महिला उद्यमियों को गार्गी उद्यमिता सम्मान से सम्मानित किया गया। इस वर्ष का गार्गी वाचक्नवी प्रेरणा सम्मान बिहार की सुप्रसिद्ध लोक गायिका रितिका राज सिंह को प्रदान किया गया। जूरी के रूप में ऋचा राजपूत, ऋतिका दरबारी और प्रज्ञा सिंह उपस्थित रहीं। इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बिहार की महिलाएं परंपरा और आधुनिकता दोनों को आत्मसात कर रचनात्मक योगदान देने में सक्षम हैं। गार्गी अध्याय के माध्यम से यह स्पष्ट हो चुका है कि बिहार की महिलाएं न केवल प्रेरणास्रोत हैं, बल्कि विकसित बिहार के निर्माण में अग्रदूत भी बन रही हैं।
कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद की सदस्य अनामिका सिंह पटेल, सुप्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नूतन, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य सुषमा साहू, बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा, डॉ. बी. प्रियम, डॉ. बिंदा सिंह, बिधु रानी सहित कई बड़े चेहरे शामिल थे। कार्यक्रम के संचालन में गार्गी अध्याय की मुख्य समन्वयक डॉ. प्रीति बाला के नेतृत्व में शायरीन इरम, नेहा सिंह, करिश्मा, नितिका अग्रवाल, नम्रता कुमारी, सुधा रंजन, रूपा मेहता, अंजलि, निशा भगत सहित अनेक महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। मंच संचालन डॉ. शबनम अखौरी, फराह नाज़ और अंजलि द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन करिश्मा द्वारा किया गया।