बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि प्रोएक्टिव (सक्रिय) पुलिसिंग, पुलिस और समुदाय के बीच बेहतर संबंध, और चुनाव आयोग की ओर से उठाए गए कदम पहले चरण में हुए विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत के प्रमुख कारण हैं।
डीजीपी ने बताया कि संभावित अपराधियों और उनके क्षेत्रों की पहले से पहचान, पर्याप्त बल की तैनाती और त्वरित कार्रवाई से न केवल पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ा है, बल्कि मतदाताओं में भी आत्मविश्वास पैदा हुआ है। बिहार ने विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर हुए मतदान में 65 प्रतिशत से अधिक का “अब तक का सबसे अधिक” मतदान दर्ज किया।
पीटीआई से बातचीत में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि सक्रिय पुलिसिंग, पुलिस-समुदाय के संबंधों में सुधार, राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास कार्य और चुनाव आयोग की पहल ये सभी कारक ऐतिहासिक मतदान के पीछे की मुख्य वजहें हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान के दौरान कहीं भी हिंसा की कोई घटना नहीं हुई।
डीजीपी ने कहा कि अब हम दूसरे चरण के चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जो मंगलवार को होने हैं। 122 विधानसभा सीटों पर स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, पहले चरण के मतदान वाले क्षेत्रों में भी कानून व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
पढे़ं: पूर्वी चंपारण में बदले समीकरण, वैश्य प्रत्याशियों पर टिका दोनों गठबंधनों का दांव; मुकाबला रोचक
डीजीपी ने बताया कि पूरे राज्य में लगभग चार लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि विधानसभा चुनाव हिंसामुक्त, सुचारू और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें। 11 नवंबर को जिन जिलों में मतदान होना है, वे हैं पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज। ये सभी जिले नेपाल की सीमा से सटे हुए हैं।
डीजीपी ने कहा कि नेपाल से सटे जिलों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कानून प्रवर्तन एजेंसियां चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में पहली बार किसी भी मतदान केंद्र पर सुरक्षा कर्मियों को हेलीकॉप्टर से नहीं उतारा गया।
डीजीपी ने कहा कि राज्य में सड़क ढांचा, खासकर ग्रामीण इलाकों में, काफी बेहतर हुआ है। इसलिए इस बार हमने फैसला किया कि चुनावी ड्यूटी पर लगे सुरक्षाकर्मी सड़कों के रास्ते ही दूरदराज के इलाकों में भेजे जाएं। वे अपने-अपने ड्यूटी सेंटर तक सड़क मार्ग से पहुंच रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में पहली बार किसी भी मतदान केंद्र को स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी है, क्योंकि नक्सली गतिविधियां राज्य में “काफी हद तक घट” गई हैं।
डीजीपी ने कहा कि संवेदनशील इलाकों में मतदाताओं की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। बिहार पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), जिसमें एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कमांडो शामिल हैं, किसी भी आपात स्थिति, सुरक्षा उल्लंघन या गंभीर घटना से निपटने के लिए तैयार हैं।