मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को चुनावी अभियान के तहत नालंदा जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में एक ही दिन में जनसभाओं को संबोधित कर एक अनूठा राजनीतिक रिकॉर्ड बना दिया। सुबह साढ़े दस बजे से शुरू हुआ यह चुनावी मैराथन शाम पौने छह बजे तक चला। इस दौरान मुख्यमंत्री ने करीब 120 किलोमीटर की यात्रा तय की।
राजगीर से शुरू हुआ चुनावी सफर
गठबंधन प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन
सीएम नीतीश कुमार ने सभी सभाओं में एनडीए के प्रत्याशियों के पक्ष में समर्थन की अपील की। उन्होंने अस्थावां से जदयू के डॉ. जितेंद्र कुमार, बिहार शरीफ से भाजपा के डॉ. सुनील कुमार, नालंदा से श्रवण कुमार, हिलसा से कृष्ण मुरारी शरण, इस्लामपुर से रुहैल रंजन और हरनौत से हरीनारायण सिंह को जिताने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रत्याशी विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं को बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि हमारी सरकार अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी के अवसर देगी। हम युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
2005 पूर्व के शासन पर साधा निशाना
विपक्ष पर निशाना साधते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि 2005 से पहले के शासनकाल में विकास नाम की कोई चीज नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा तो अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। उन लोगों को बिहार के विकास से कोई मतलब नहीं था। उस दौर में डर और भय का माहौल था। शाम के बाद लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। न बिजली थी, न सड़कें, न साफ पानी और न अस्पतालों की सुविधा।
गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने सात निश्चय योजना की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि हर घर तक शुद्ध पेयजल और बिजली पहुंचाई गई है। किसानों को सिंचाई योजनाओं से राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि हर घर तक 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है। बारिश के बावजूद हर सभा में भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने उत्साहपूर्वक मुख्यमंत्री का भाषण सुना।
महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर
नीतीश कुमार ने कहा कि महिलाओं को नौकरी और पंचायती राज में आरक्षण देकर सशक्त बनाया गया है। उन्होंने बताया कि 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर ‘जीविका’ योजना की शुरुआत की गई थी। आज एक करोड़ से अधिक महिलाएं जीविका समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। उन्होंने जोड़ा कि 2024 में शहरी क्षेत्रों में भी जीविका का गठन शुरू किया गया, जहां अब तक 3 लाख 85 हजार महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं।
अल्पसंख्यकों के लिए किए कार्यों का जिक्र