बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट शेयरिंग की घोषणा के बाद से ही हलचल मच गई है। रविवार को जारी हुई घोषणा के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड दोनों समान सीटों पर चुनाव लड़ने वाली थी। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तान अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक जनतांत्रिक मोर्चा के सीटों की भी घोषणा कर दी गई है। लेकिन घोषणा के तुरंत बाद ही उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी और जीतन राम मांझी की पार्टी ने सीट बंटवारे पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर कर दी है। उपेन्द्र कुशवाहा ने तो सोशल मीडिया पर भी अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी के साथ एक शायरी भी पोस्ट की। वहीं जीतनराम मांझी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कम सीट देकर उनकी पार्टी की अहमियत कम आंकी गई है, जिसका असर एनडीए पर पड़ सकता है।
सोमवार को शाम 4 बजे भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एनडीए की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस होनी थी, जिसमें सीट बंटवारे का औपचारिक ऐलान होना था, लेकिन अचानक इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि भाजपा और जदयू के बीच कुछ सीटों को लेकर मतभेद अब भी बना हुआ है। सीटों की अदला-बदली और उम्मीदवार चयन को लेकर अभी भी बातचीत अधूरी रह गई। हालांकि इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और जदयू नेता संजय झा की गुप्त बैठकें भी हुई, लेकिन समस्या अब तक बरकरार है।एलआरएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने अपनी नाराज़गी को शायराना अंदाज़ में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि, “आज बादलों ने फिर साजिश की, जहां मेरा घर था वहीं बारिश की। अगर फलक की जिद है बिजली गिराने की, तो हमें भी जिद है वहीं पर आशियां बसाने की।” वहीं हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने भी सीट बंटवारे के बाद असंतोष जाहिर किया। उन्होंने पहले कहा, “मैं संतुष्ट हूं”, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि, “आलाकमान ने जो फैसला लिया है, वह स्वीकार है, लेकिन सिर्फ 6 सीट देकर हमारी अहमियत कम आंकी गई है। इसका असर एनडीए पर पड़ सकता है।”