भारत निर्वाचन आयोग ने बीएलओ एवं बीएलओ सुपरवाईजर को उनके मानदेय का एकमुश्त भुगतान कर दिया है। यह भुगतान उनके वार्षिक मानदेय के अतिरिक्त निर्वाचक सूची की तैयारी एवं विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के लिए भी दिया गया है। उन्हें मानदेय के रूप में 6,000 रुपए मिलने हैं। इस भुगतान के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने पूरे बिहार के सभी 38 जिलों को राशि आवंटित की है। सभी 38 जिलों में कुल इक्यावन करोड़ उनहत्तर लाख नब्बे हजार रुपए भेजे गए हैं। इस बात की जानकारी सभी जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह-जिला पदाधिकारी को दी गई है।
भाजपा भी करेगी सम्मानित
अब भारतीय जनता पार्टी भी अपने बीएलए यानी बूथ लेवल एजेंट को सम्मानित करेगी। विधानसभा आम चुनाव 2025 में उनके बेहतर काम को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उन सभी बूथ लेवल एजेंट को सम्मानित करने का फैसला किया है। यह सम्मान समारोह 29 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इस बात का निर्णय शनिवार को भाजपा चुनाव प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित बैठक में लिया गया।
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भाजपा चुनाव प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित बैठक में भाजपा चुनाव प्रबंधन विभाग के प्रदेश संयोजक राधिका रमण ने यह प्रस्ताव पेश किया कि बिहार विधान सभा चुनाव में बिहार के सभी 243 सीटों पर काम कर रहे भाजपा के बूथ लेवल एजेंट को उनके बेहतर काम के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। तब बैठक में उपस्थित प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उनकी इस मांग पर अपनी मुहर लगा दी। इस बैठक का आयोजन प्रदेश भाजपा कार्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में किया जाएगा, जिसमें भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।
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बैठक के दौरान बताया गया कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता गहन पुनरीक्षण कराया। एसआईआर के बाद हुए चुनाव में जहां एक ओर एनडीए की प्रचंड जीत हुई वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की करारी हार हुई। बताया जा रहा है कि बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में फर्जी और डबल वोटरों का नाम मतदाता सूची से हटाने में भाजपा के बीएलओ की बड़ी भूमिका निभाई रही।दरअसल चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार में मतदाता गहन पुनरीक्षण कराया। उसके बाद हुए पहले चुनाव में एनडीए को प्रचंड जीत मिली तो विपक्षी राजद और कांग्रेस धरती पर आ गए। बीजेपी 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। माना जा रहा है कि बीजेपी के बीएलओ ने फर्जी और डबल वोटरों का नाम मतदाता सूची से कटवाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस संबंध में चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग ने सभी दलों के बीएलओ को एसआईआर में सहयोग के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन सिर्फ भाजपा के बीएलए सामने आए। उन्होंने अपने इलाके के बीएलओ को मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में सहयोग किया।