आज बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया गया, जिसमें बिहार की अर्थव्यवस्था और जिलों की संपन्नता की नई तस्वीर सामने आई है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी पटना प्रदेश का सबसे समृद्ध जिला बनकर उभरा है। वहीं, विकास की दौड़ में शिवहर सबसे निचले पायदान पर है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पटना की प्रति व्यक्ति आय, शिवहर के मुकाबले लगभग छह गुना से भी ज्यादा है, जो राज्य के भीतर मौजूद आर्थिक असमानता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
आय के मामले में सबसे ऊपर और सबसे नीचे कौन
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की औसत प्रति व्यक्ति आय अब 76,490 रुपये हो गई है। प्रति व्यक्ति आय के आधार पर जिलों की रैंकिंग में पटना सबसे आगे है। उन आकंड़ों के मुताबिक़ सबसे अमीर जिलों में पटना में प्रति व्यक्ति आय 1,31,332 रुपये, बेगूसराय का 61,566 रुपए, मुंगेर का 54,469 रुपए और सबसे गरीब जिलों में शिवहर है जिसका प्रति व्यक्ति आय 18,980 रुपया, अररिया का 19,795 रुपया और सीतामढ़ी का 21,448 रुपया प्रति व्यक्ति आय है।
पटना हर मोर्चे पर आगे
जिलों की संपन्नता को मापने के लिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की खपत को भी आधार बनाया गया है। इसमें भी पटना ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। पेट्रोल की खपत के मामले में राजधानी पटना पहले, मुजफ्फरपुर दूसरे और पूर्णिया तीसरे स्थान पर है। सबसे कम पेट्रोल की खपत लखीसराय, बांका और शिवहर में दर्ज की गई। डीजल की खपत में पटना शीर्ष पर है, इसके बाद शेखपुरा और औरंगाबाद का नंबर आता है। वहीं, शिवहर, सीवान और कैमूर में डीजल की खपत सबसे कम रही। रसोई गैस यानी एलपीजी की सबसे ज्यादा खपत पटना, बेगूसराय और गोपालगंज में हो रही है, जबकि अररिया, बांका और मधेपुरा इस सूची में सबसे पीछे हैं।
लघु बचत में भी पटना अव्वल
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि प्रति व्यक्ति लघु बचत के मामले में भी संपन्न जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्वेक्षण न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति को दिखाता है, बल्कि उन क्षेत्रों की भी पहचान करता है जहां विकास की योजनाओं को तेजी से पहुंचाने की जरूरत है।