दिखने को विधायक 41 तेजस्वी के साथ, लेकिन मौके पर चार तो खुद को बाहर दिखा चुके। इनमें तीन कांग्रेसी।
- फोटो : amar ujala digital
कांग्रेस विधायक राज्यसभा चुनाव में दिखा चुके लक्षण
किसी भी विपक्ष के लिए सत्ता पक्ष का बहुमत प्रस्ताव एक मौका होता है, लेकिन इस बार तेजस्वी यादव शायद ही कोई खतरा मोल लें। इस खतरे की जांच वह राज्यसभा चुनाव में कर चुके हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान बिहार की पांच में से एक सीट पर महागठबंधन लड़ाई में था, लेकिन राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायकों की गैरहाजिरी ने ऐन मौके पर तेजस्वी यादव के पूरे मैनेजमेंट को चकनाचूर कर दिया। तेजस्वी यादव 12 फरवरी 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण के दौरान नंबर गेम खेलकर मात खा चुके हैं। तब भी महागठबंधन के विधायकों ने पाला बदल कर तेजस्वी को जोर का झटका दिया था।
तेजस्वी यादव एनडीए की सरकार गिराने का दावा कर रहे थे और उस फ्लोर टेस्ट में महागठबंधन की रही-सही ताकत भी चली गई थी। शेष कसर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूरी हो गई, जब 202 के मुकाबले महागठबंधन 35 पर रह गया था। इनमें राजद के 25, कांग्रेस के छह, भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी के दो, भारतीय काम्युनिस्ट पार्टी और आईआईपी के एक-एक विधायक थे। राज्यसभा चुनाव के दौरान असद्दुदीन ओवैसी की AIMIM के पांच और कुमारी मायवती की बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक ने महागठबंधन का साथ दिया। राजद के एक और कांग्रेस के तीन गायब रहे थे। यानी, दिखने को तेजस्वी के पास 41 विधायक ऑन रिकॉर्ड हैं, लेकिन इनमें से चार को घटाकर ही चलना चाहिए।