बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोपहर 2 बजे विधानसभा में बजट रखा। विधानसभा चुनाव के बाद यह नीतीश कुमार सरकार का पहला पूर्ण बजट है, जिससे शहरी विकास, आवास, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को लेकर अपेक्षाएं जुड़ी हुई हैं। बजट में नगर विकास एवं आवास विभाग से जुड़ी योजनाओं की स्थिति और आगे की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है।
शहरीकरण को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का दावा
राज्य सरकार ने कहा है कि वह राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में बिहार में 19 नगर निगम, 89 नगर परिषद और 156 नगर पंचायत कार्यरत हैं। सरकार का लक्ष्य इन सभी शहरी निकायों को विकसित कर शहरों को अधिक सुंदर बनाना और नागरिकों को मूलभूत व बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी आवासों की प्रगति
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत अब तक कुल 4,18,394 आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से 1,75,249 परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराया गया है। बजट में इस योजना को शहरी गरीबों के लिए आवास सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम पहल बताया गया है।
नमामि गंगे योजना से गंगा शहरों में सीवरेज ढांचा
नमामि गंगे योजना के तहत राज्य के 24 गंगा शहरों में से 22 शहरों के लिए 8,426.01 करोड़ रुपये की लागत से 39 एसटीपी और सीवरेज नेटवर्क योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 24 योजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सरकार का कहना है कि इससे गंगा नदी की स्वच्छता और शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और कचरे से ऊर्जा पर फोकस
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के अंतर्गत पटना शहर सहित आसपास के 12 नगर निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए पीपीपी मोड पर इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में कचरे से बिजली उत्पादन का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राज्य के 261 नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए 2938 टीपीडी क्षमता के एमआरएफ प्लांट, 3387 टीपीडी क्षमता के कम्पोस्ट प्लांट, 100 टीपीडी का बायोमेथेनाइजेशन प्लांट और 1311 टीपीडी क्षमता के सैनिटरी लैंडफिल की स्वीकृति दी गई है।
स्मार्ट सिटी मिशन में योजनाओं की स्थिति
पटना, बिहारशरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कुल 122 योजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें से 101 योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से शहरी आधारभूत ढांचे और सेवाओं में सुधार हुआ है।
यातायात और सार्वजनिक ढांचे पर निवेश
नगर निकाय क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वीकृत 43 बस स्टैंड निर्माण योजनाओं में से 34 का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसके साथ ही राज्य के 143 नगर निकायों में बहुउद्देश्यीय भवन के रूप में सम्राट अशोक भवन योजना को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 44 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
फुटपाथ विक्रेताओं और महिलाओं के लिए सुविधाएं
फुटपाथ विक्रेताओं की सुविधा के लिए नगर निकायों में 66 वेंडिंग जोन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 25 वेंडिंग जोन का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राज्य के 20 नगर निकायों में कुल 105 पिंक टॉयलेट निर्माण योजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
पटना मेट्रो और शहरी परिवहन की दिशा
पटना शहर में तेज और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था के लिए 32.50 किलोमीटर लंबी पटना मेट्रो रेल परियोजना पर काम चल रहा है। इसमें से 3.45 किलोमीटर में मेट्रो रेल का परिचालन 6 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुका है। सरकार का मानना है कि इससे राजधानी की यातायात व्यवस्था को राहत मिलेगी।
समग्र शहरी विकास और अन्य योजनाएं
मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत राज्य के विभिन्न नगर निकायों में 2,091.90 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय पर कुल 3,208 योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय-2 के अंतर्गत 41 शहरों और महत्वपूर्ण नदी घाटों पर स्वीकृत शवदाहगृह निर्माण योजनाओं में से 10 का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में जल जमाव की समस्या के समाधान के लिए 3,559.95 करोड़ रुपये की लागत से 38 स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज योजनाओं को स्वीकृति दी गई है।