मनेरशरीफ बिहार में इस्लामिक संस्कृति के सबसे पुराने केंद्रों में से एक है। यह स्थान ग्यारहवीं शताब्दी में और उसके बाद भी यह सूफी संतों का आध्यात्मिक केंद्र था। यहां देश भर से सूफी संत आया करते थे और सूफी मत के प्रसार के लिए विमर्श किया करते थे। यहां महान सूफी संत हजरत मखदूम यहिया मनेरी की कब्र मौजूद है, जहां भव्य मकबरे का निर्माण किया गया है। मखदूम साहब का इंतकाल 1291 ई. में हुआ था।
देश के सूफी संतों में उनका नाम आज भी बड़े अदब से लिया जाता है। मनेरशरीफ में पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण का कार्य संपन्न किया जा रहा है। मनेरशरीफ में पर्यटन विभाग द्वारा मनेरशरीफ मकबरे के दर्ज पर 99.98 लाख रुपये की लागत से बन रहे तीन भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा कराए जा रहे कार्य में अबतक मनेरशरीफ मकबरे के दर्ज पर बन रहे दो थिमेटिक गेट का निर्माण पूरा कर लिया गया है और तीसरे थिमेटिक गेट का भी कार्य लगभग 70 फीसदी पूरा किया गया है।
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वास्तुविद मेसर्स कपूर्स एंड एसोसिएट्स द्वारा इस प्रवेश द्वार का डिजाइन बनाया गया है। इस कार्य के अंतिम चरण में सौंदर्यीकरण के बाकी बचे सभी कार्यों को संपन्न किया जाना है। इसके निर्माण के उपरांत मनेरशरीफ आने वाले पर्यटकों के लिए भव्य प्रवेश द्वार उनके लिए आकर्षण का एक नया केंद्र होगा।