पटना से करीब 95 किलोमीटर दूर है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जनपद या कहिए गढ़ नालंदा। यहां तीन दशक से नीतीश का ही सिक्का चल रहा है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद उन्होंने एनडीए के खिलाफ नालंदा में जद-यू को जीत दिलाई। यहां सात विधानसभा सीटें हैं जिनमें से पांच पर जदयू का कब्जा है।
मुजफ्फरपुर से वैशाली जाते समय कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां याद आ गईं...
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वैशाली जन का प्रतिपालक, विश्व का आदि विधाता
जिसे ढूंढता विश्व आज, उस प्रजातंत्र की माता
रुको एक क्षण पथिक, इस मिट्टी पर शीश नवाओ
राज सिद्धियों की समाधि पर फूल चढ़ाते जाओ
दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में, देश को दिशा देने वाले राज्य बिहार के सबसे बड़े पर्व चुनाव को समझने के लिए वैशाली की यात्रा स्वाभाविक है। विश्व के सर्वप्रथम गणतांत्रिक राज्य वैशाली में भगवान महावीर का जन्म हुआ था। तीन बार महात्मा बुद्ध का यहां आगमन हुआ। जिला मुख्यालय हाजीपुर से करीब 35 किमी पहले श्रीरामपुर में खेत में बने एक किओस्क पर हम रुकते हैं। सुबह 11:30 बजे हैं और इस ग्राहक सेवा केंद्र-बैंक ऑफ बड़ौदा पर करीब 15 महिलाएं जुटी हैं। बातचीत में पता चलता है कि महिलाओं के लिए जीविका स्कीम आई है जिसमें काम-रोजगार के लिए दस-दस हजार रुपया दिया जा रहा है। उसी का खाता खुलवाने सब आई हैं। सीतादेवी का मन टटोलने की कोशिश की तो बेलौस बोल पड़ीं...अरे जो पइसा देगा, ओकरे का ही तो वोट देंगे न। बिहार में विधानसभा चुनाव करीब है और ऐसे में नीतीश सरकार खूब लालीपॉप बांट रही है। सौ यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है तो कल्याणकारी योजनाओं की झड़ी लगी है। चुनाव में इसका असर लाजिमी माना जा रहा है।
धंधा हुआ मंदा तो दिखी सरकार में खोट
लालगंज तहसील में सड़क किनारे चार-पांच किशोर खाट पर बैठे मोबाइल पर पबजी खेल रहे थे। उन्हें मोबाइल छोड़ बातचीत करने के लिए राजी करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। उनकी बातों में सरकार के प्रति गुस्सा था। पता चला कि इस इलाके के अधिकतर लोग रेती-बालू का धंधा करते थे। खनन कानून सख्त हुआ तो इनका धंधा बंद हो गया। वो इस बात को तो मानते हैं कि सड़क, बिजली जैसेनालंदा में सिर्फ नीतीश का नाम मामलों में काम हुआ है। लोगों का कहना था कि अभी भी सरेआम अवैध खनन चल रहा है, पुलिस वसूली बढ़ गई है। अजय कुमार कहते हैं कि बिहार में शराब बंदी कहीं नहीं है, होम डिलीवरी चल रही है।
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नालंदा में सिर्फ नीतीश का नाम
पटना से करीब 95 किलोमीटर दूर है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जनपद या कहिए गढ़ नालंदा। यहां तीन दशक से नीतीश का ही सिक्का चल रहा है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद उन्होंने एनडीए के खिलाफ नालंदा में जद-यू को जीत दिलाई। यहां सात विधानसभा सीटें हैं जिनमें से पांच पर जदयू का कब्जा है। एक सीट सहयोगी भाजपा के पास है। 2014 में मोदी की जोरदार लहर के बावजूद यहां से नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी को जीत दिलाई थी, जबकि उनके खिलाफ एक तरफ राजद-कांग्रेस गठजोड़ था तो दूसरी ओर एनडीए गठबंधन। अपने वोटरों पर ऐसा भरोसा कि 1995 में यहां चुनाव में खड़े हुए तो यह कहकर चले गए कि मैं प्रचार करने नहीं आ पाऊंगा। और वे भारी मतों से जीते। एएन सिन्हा शोध संस्थान के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर कहते हैं कि बिहार मे कोई भी योजना बनती है तो सबसे पहले नालंदा में शुरू होती है, यहां नीतीश ने बहुत काम कराया है।
पहले अपराध का गढ़ अब टूरिस्टों की बाढ़
बुजुर्ग पत्रकार देवीसरन बताते हैं कि कोरोना काल में भी नालंदा जिले के मुख्यालय बिहारशरीफ में आठ होटल खुले। चार साल में टूरिस्ट दूने हो गए हैं। कभी अपराध इतने चरम पर थे कि सड़क किनारे बोर्ड लगे रहते थे-यहां से आगे जाएं तो कृपया संबंधित थाने को सूचित कर दें।