नालंदा विश्वविद्यालय में 25वें अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन का समापन हुआ। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने बिहार को भारत का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बताया। सम्मेलन में 26 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और 498 शोध पत्रों पर चर्चा हुई।
नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित 25वें अंतरराष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान सम्मेलन (आईएएसएससी) का चार दिवसीय आयोजन राज्यपाल सैयद अता हसनैन के संबोधन के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन के समापन समारोह में देश के भविष्य और विकास की रूपरेखा पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बिहार देश का गढ़ और भारत का 'सेंटर ऑफ ग्रेविटी' है। जब तक बिहार का सर्वांगीण विकास नहीं होगा, तब तक वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरी तरह साकार नहीं हो सकता।
महंगाई के सवाल पर उन्होंने बताया कि देश में स्थिति नियंत्रण में है। भारत के पास 60 मिलियन टन से अधिक चावल और गेहूं का बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिससे खाद्य महंगाई के बेकाबू होने का जोखिम नहीं है। बाकी मौद्रिक नीतियां रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति तय कर रही है। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में ऐसे गहरे सबक हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ बेहतर संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।
कुलपति ने बताया कि सम्मेलन में मुख्य रूप से संस्कृति, विकास, पोषण और खाद्य सुरक्षा की भूमिका पर मंथन हुआ। वर्ष 2030 में सतत विकास लक्ष्यों की मौजूदा समय-सीमा पूरी हो रही है। ऐसे में सम्मेलन के दौरान पोस्ट-2030 की प्राथमिकताओं को लेकर रोडमैप तैयार किया गया।
स्कूल-कॉलेजों तक पहुंचेगा सतत विकास का संदेश
सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि राज्यपाल के विजन के अनुरूप नालंदा विश्वविद्यालय पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों और राज्य सरकार के माध्यम से विद्यालयों के साथ मिलकर काम करेगा। अगले दो वर्षों में पूरे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में सतत विकास लक्ष्यों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन को लेकर सघन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य भावी पीढ़ी को विकसित भारत के लक्ष्यों के प्रति सजग करना और सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।