पटना उच्च न्यायालय ने बिहार की अधीनस्थ अदालतों को जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं का दो महीने में निपटारा करने का निर्देश दिया है। देरी पर कारण बताना होगा। पुलिस को पांच दिनों में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार की सभी अधीनस्थ अदालतों के लिए जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटारे को लेकर नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत जमानत याचिकाओं का निपटारा दो महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समयसीमा में याचिका का निपटारा नहीं होने पर संबंधित न्यायाधीश को देरी का स्पष्ट कारण आदेश पत्र में दर्ज करना होगा। इस पहल का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना और जमानत याचिकाओं के निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी को रोकना है। उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुपालन में ये निर्देश जारी किए हैं।
इसके अलावा जख्म रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट और केस डायरी पांच दिनों के भीतर अदालत को उपलब्ध करानी होगी। कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय बचाने के लिए केस डायरी की स्कैन प्रति व्हाट्सऐप या ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों से भेजने और उसे अदालत में डिजिटल रूप में पेश करने की व्यवस्था भी की गई है।
60 दिन से अधिक पुरानी या दो महीने की समयसीमा के करीब पहुंच चुकी याचिकाओं को प्राथमिकता देने के लिए लाल निशान से चिह्नित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सभी अधीनस्थ अदालतों को जमानत मामलों का मासिक विवरण संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भेजना होगा। इससे लंबित मामलों की स्थिति पर नजर रखने और समयसीमा के भीतर उनका निपटारा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।