भारतीय पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर कृष्णन बी पाठक ने रविवार को अपने करियर का बड़ा माइलस्टोन छुआ। 28 वर्षीय पाठक ने हीरो मेंस एशिया कप राजगीर 2025 में जापान के खिलाफ खेले गए मैच में भारत का 150वां बार प्रतिनिधित्व किया। इस खास उपलब्धि पर हॉकी इंडिया ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके योगदान को सराहा।
लखनऊ से राजगीर तक का सफर
पंजाब के कपूरथला से ताल्लुक रखने वाले कृष्णन पाठक ने पहली बार 2016 में सुर्खियां बटोरीं, जब वे लखनऊ में आयोजित एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बने। इसके दो साल बाद उन्होंने जनवरी 2018 में जापान के खिलाफ फोर-नेशंस टूर्नामेंट से सीनियर टीम में डेब्यू किया। अपनी निरंतरता और तेज रिफ्लेक्सेस की बदौलत उन्होंने जल्द ही भारतीय गोलपोस्ट पर स्थायी जगह बना ली।
भारत की ऐतिहासिक जीतों का हिस्सा
पाठक अब तक भारत की कई अहम उपलब्धियों में अहम कड़ी रहे हैं। वे 2018 एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी (पाकिस्तान के साथ संयुक्त स्वर्ण), 2022 हांगझोउ एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक और 2023 व 2024 में लगातार जीती गई एशियन चैम्पियंस ट्रॉफी में टीम का हिस्सा रहे। इसके अलावा उन्होंने एफआईएच प्रो लीग 2020/21 और 2021/22, 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स (रजत पदक) और एफआईएच ओडिशा वर्ल्ड कप 2023 में भी अपनी गोलकीपिंग का लोहा मनवाया।
पीआर श्रीजेश के बाद बने भरोसेमंद गोलकीपर
पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद महान गोलकीपर पीआर श्रीजेश के संन्यास लेने के बाद पाठक भारतीय टीम के पहले-पसंद गोलकीपर बन गए। उनके अनुभव और स्थिर प्रदर्शन ने भारत की रक्षापंक्ति को मजबूती दी है।
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कृष्णन बी पाठक को दो बार हॉकी इंडिया बलजीत सिंह अवार्ड फॉर गोलकीपर ऑफ द ईयर (2019, 2022) से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा 2024 में उन्हें भारतीय खेलों के प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से भी नवाजा गया।
पाठक का भावुक संदेश
अपने माइलस्टोन पर प्रतिक्रिया देते हुए कृष्णन बी पाठक ने कहा कि यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद खास पल है। भारत का 150 बार प्रतिनिधित्व करना एक सपना था जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यह माइलस्टोन मेरे लिए खास है क्योंकि यह इतने महत्वपूर्ण टूर्नामेंट के दौरान आया है। मैं अपने कोचों, साथियों और हॉकी इंडिया का आभारी हूं। अब मेरा फोकस टीम की सफलता और आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करने पर है।
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हॉकी इंडिया ने की प्रशंसा
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने कहा कि कृष्णन भारतीय हॉकी के स्तंभों में से एक हैं। गोलकीपिंग बेहद चुनौतीपूर्ण भूमिका है और उन्होंने लगातार बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी यात्रा हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणादायक है। वहीं, महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा कि हम कृष्णन की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं। उनका समर्पण और धैर्य असाधारण है। 150 मैच पूरे करना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी में उनके योगदान का प्रमाण है।