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Bihar Politics: 'अब कोई छलावा नहीं', नीतीश कुमार ने मुस्लिम समाज को लेकर साझा की लंबी पोस्ट; क्यों पड़ी जरूरत

Sat, 25 Oct 2025 07:14 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दंगल में घमासान मचा हुआ है। एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला जारी है। इस बीच, नीतीश कुमार ने मुस्लिम समाज को लेकर एक लंबी पोस्ट सोशल मीडिया पर की है। चलिए बताते हैं क्या-क्या लिखा है।
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सीएम नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Bihar Assembly Elections 2025:  बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला रोचक बना हुआ है। इस दौरान सीएम नीतीश कुमार की एक पोस्ट की चर्चा जोर पकड़ रही है। उन्होंने मुस्लिम समाज को लेकर एक लंबा पोस्ट लिखा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा कि वर्ष 2005 से पहले राज्य में मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए कोई काम नहीं होता था। उससे पहले बिहार में जिन लोगों की सरकार थी, उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों का सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आए दिन साम्प्रदायिक झगड़े होते रहते थे। 24 नवंबर 2005 को जब हमारी सरकार बनी, तब से मुस्लिम समुदाय के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आप सभी जानते हैं कि वर्ष 2025-26 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बजट में 306 गुणा की वृद्धि करते हुए 1080.47 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है। राज्य में साम्प्रदायिक घटनाएँ न हों, इसके लिए वर्ष 2006 से संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी शुरू की गई।

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'मदरसा के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जा रहा'
अब तक 8 हजार से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी कर दी गई है। मुस्लिम समाज के परामर्श से 1273 और कब्रिस्तानों को घेराबंदी के लिए चिन्हित किया गया, जिसमें 746 कब्रिस्तानों की घेराबंदी पूर्ण हो गई है और शेष का काम शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इन्हीं विपक्षी दलों की जब सरकार थी, तो वर्ष 1989 में भागलपुर में साम्प्रदायिक दंगे हुए। दंगा रोकने में सरकार विफल रही और साम्प्रदायिक दंगा पीड़ितों के लिए पूर्व की सरकारों ने कुछ नहीं किया। जब हमें सेवा का मौका मिला, तो भागलपुर साम्प्रदायिक दंगे की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई और दंगा पीड़ितों को मुआवजा दिया गया। साथ ही, दंगा से प्रभावित परिवारों को पेंशन के रूप में भी मदद दी जा रही है। पहले कितना हिंदू-मुस्लिम झगड़ा होता था, अब आज कोई झगड़ा नहीं होता है। वर्ष 2006 से मदरसों का निबंधन किया गया तथा उन्हें सरकारी मान्यता दी गई। मदरसा के शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जा रहा है।

मुस्लिम वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए इन योजनाओं का किया जिक्र
इसके अलावा मुस्लिम परित्यक्ता/तलाकशुदा महिलाओं को रोजगार देने के लिए वर्ष 2007 से 10 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाने लगी, जिसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। मुस्लिम समुदाय के लिए तालीमी मरकज और हुनर जैसी उपयोगी योजनाएं चलायी गईं। मुस्लिम वर्ग के छात्र-छात्राओं एवं युवाओं के लिए छात्रवृत्ति, मुफ्त कोचिंग, छात्रावास, अनुदान आदि योजनाएँ चलायी जा रही हैं। युवाओं को अपना रोजगार शुरू करने के लिए उद्यमी योजना का लाभ दिया जा रहा है।

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अब बिहार विधानसभा चुनाव के समय कुछ लोग फिर से अपने-आप को मुस्लिम समुदाय का हितैषी बताने में जुट गए हैं। ये सब छलावा है। सिर्फ मुस्लिम वर्ग के लोगों का वोट हासिल करने के लिए तरह-तरह के लालच और हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, जबकि उन्हें किसी तरह की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी देने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

हमारी सरकार में आज मुस्लिम समाज के लोगों को उनका पूरा हक मिल रहा है। बिना किसी भेदभाव के उन्हें हर क्षेत्र में उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है, जबकि पूर्व की सरकारों ने मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल सिर्फ वोट के लिए किया और उन्हें कोई हिस्सेदारी नहीं दी। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि आप लोग किसी भ्रम में न रहें। हमारी सरकार ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिए और उसी आधार पर तय कीजिए कि अपना वोट किसे देना है।

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नीतीश की इस  पोस्ट के सिसायी मायनें क्या?
जैसा कि नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट पर लिखा है। लेकिन सियासी जानकारों कि मानें तो चुनाव के ठीक मुहानें में नीतीश कुमार का मुस्लिम समाज को अपनी ओर लुभाने का प्रयास इस पोस्ट के जरिए किया गया। खैर देखना होगा कि नीतीश की इस पोस्ट को लेकर मुस्लिम समाज की क्या प्रतिक्रिया आती है? क्या वो फिर से सुशासन बाबू पर भरोसा करेंगे। या फिर महागठबंधन खेमें में पलटी मारेंगे। खैर जो भी वो तो वक्त ही बताएगा। 

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