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Bihar: नालंदा में 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति गठित; विजय चौधरी अध्यक्ष तो JDU-BJP नेता बने उपाध्यक्ष

Sat, 10 Aug 2024 12:47 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा

सार

Nalanda News: नालंदा में 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का गठन कर लिया गया है। जदयू नेता विजय कुमार चौधरी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, जदयू और भाजपा जिला अध्यक्षों को उपाध्यक्ष बनाया गया है। दरअसल, महागठबंधन से हटने के बाद सीएम नीतीश द्वारा इस समिति को भंग कर दिया गया था। 
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जदयू नेता विजय कुमार चौधरी बने अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में महागठबंधन से हटते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति को भंग कर दिया था। इस समिति में जदयू के अलावा राजद, कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जगह दी गई थी। महागठबंधन से हटने के बाद बिहार में एनडीए की सरकार बनी और एक बार फिर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति को लेकर नई टीम का एलान कर दिया है।

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इस समिति में जिला प्रभारी मंत्री को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, स्थानीय एनडीए गठबंधन के नेताओं को उपाध्यक्ष और सदस्य के रूप में मौका दिया गया है। इनमें जदयू, भाजपा, लोजपा, राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हम के नेता तथा कार्यकर्ताओं को जगह दी गई है।

नालंदा में जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार चौधरी को अध्यक्ष, जबकि जदयू के जिला अध्यक्ष मो. मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ अरशद तथा भाजपा के जिला अध्यक्ष रवि शंकर प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाया गया है। मो. नदीम जफर उर्फ गुलरेज अंसारी, नवीन मांझी, मनोरमा देवी, भरत शर्मा, धनंजय देव, रीना कुमारी, सरयुग रविदास, जनार्दन पंडित, धर्मेंद्र प्रसाद चौहान, रंजीत कुमार, रीना कुमारी, शैलेंद्र कुमार, अविनाश प्रसाद सिंह, रामसागर सिंह, विकास कुमार, प्रज्ञा भारती, संतोष भारती, महेंद्र सिंह यादव, लालजीत पासवान, विश्वजीत पासवान, सोनू कुशवाह और सत्येंद्र पासवान उर्फ मुकुट को सदस्य बनाया गया है।
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जिला और प्रखंड स्तर पर 20 सूत्री कमिटी के लोग न सिर्फ एक-एक योजनाओं की मॉनिटरिंग करते हैं। बल्कि जनता की जरूरत के हिसाब से योजनाओं का चयन भी करवाते हैं। यह काम आजकल पंचायत में मुखिया और प्रखंड प्रमुख अपने स्तर से करते हैं। इसके अलावा सांसद और विधायक भी अपने-अपने स्तर से योजनाओं का चुनाव कर लेते हैं। 20 सूत्री समिति बन जाने के बाद किसी का भी एकाधिकार नहीं चलता है।

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