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कांस्टेबल भर्ती में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए प्रावधान न होना संविधान के खिलाफ: अदालत

Tue, 15 Dec 2020 07:43 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, पटना
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सांकेतिक तस्वीर
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पटना उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा है कि बिहार में चल रही कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में ‘संविधान के प्रावधान’ का पालन नहीं किया गया है क्योंकि ट्रांसजेंडर श्रेणी के लिए आवेदन का कोई प्रावधान नहीं किया गया था। अदालत ने सोमवार को राज्य सरकार को तुरंत इस मामले को देखने, सुधारात्मक कार्रवाई करने और अगले आदेश तक अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तारीख तय की।

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मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस. कुमार की खंड पीठ ने आदेश देते हुए इंगित किया कि आवेदन आमंत्रित करने के लिए दिया गया विज्ञापन संविधान के प्रावधानों के अनुरुप नहीं है। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) कानून, 2019 के तहत आने वाले लोग पद के लिए आवेदन कर सकते हैं या नहीं। उल्लेखनीय है कि विज्ञापन में पात्रता मानकों में सिर्फ 'पुरुष' और 'महिला' श्रेणी इंगित की गई है, इसमें थर्ड जेंडर का कोई जिक्र नहीं है।


अदालत वीरा यादव नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यादव ने अपनी अर्जी में जानना चाहा है कि क्या दिव्यांगों के लिए तय कोटा के आधार पर ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए भी भर्ती में कोई कोटा तय किया गया है। अदालत ने इसपर सरकार के वकील की ओर से दी गई सूचना पर संज्ञान लिया कि ‘ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए अलग से कोई आरक्षण नहीं है, उन्हें ओबीसी के तहत प्राप्त आरक्षण ही मिलेगा।’

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