बिहार में सीवान जिला प्रशासन पर माननीय पटना हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उसमें 25 हजार सीओ और 25 हजार रुपये डीएम को जुर्माने की राशि भरनी होगी। यह मामला दरौंदा थाना क्षेत्र के दरौंदा बाजार स्थित प्रखंड कार्यालय और श्मशान की जमीन पर कुछ जमीन माफियाओं के अतिक्रमण कर लेने से संबंधित है।
राजस्व विभाग पटना ने भी की मामले की अनदेखी
जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र ठाकुर 2009 से सरकार का ध्यान आकृष्ट करते रहे। मामले में कोई हस्तक्षेप न होने पर उन्होंने 2017 में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए लोकहित याचिका पटना हाईकोर्ट में दायर की थी। उसके बाद पटना हाईकोर्ट ने सभी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए छह महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश प्रशासन को दिया था। लेकिन अतिक्रमण हटाने के बजाय कई नई दुकानें बना दी गईं। इसकी जानकारी याचिकाकर्ता ने राजस्व विभाग पटना को दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस बीच में कुछ अतिक्रमणकारियों ने पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दी। उसके बाद कोर्ट ने उस याचिका को खारिज करते हुए पुनः आदेश का पालन करने का आदेश दिया। लेकिन जिला प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद याचिकाकर्ता वीरेंद्र ठाकुर ने कोर्ट में अवमानना का मामला दायर किया था। उसके बाद कोर्ट ने अवमानना का मामला मानते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
नए जिलाधिकारी ने कोर्ट के आदेश पर की कार्रवाई
हाईकोर्ट ने दरौंदा की जमीन से अतिक्रमण नहीं हटने पर सीवान डीएम और अंचलाधिकारी के उपर 25-25 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया। ऐसे में जिले के नए जिलाधिकारी ने मामले पर संज्ञान लिया। फिर सीओ को हाईकोर्ट के आदेश को तुरंत पालन करने को कहा गया। तब कुछ जेसीबी लगाकर अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हुआ।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही किया जा रहा है। आधा-अधूरा अतिक्रमण ही हटाया गया है। कुछ बड़े लोग हैं जिनको बचाया जा रहा है। इसलिए इसकी जांच स्वंय जिलाधिकारी को करनी चाहिए।