दशहरा महोत्सव में कलाकारों ने बांधा समा।
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दुर्गा वंदना, सामा-चकेवा और झिझिया ने बिखेरे रंग
कला श्री समूह के कलाकारों ने दुर्गा वंदना पर आधारित शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से भक्ति और भारतीय शास्त्रीय कला का संगम देखने को मिला। सामा-चकेवा पर्व पर आधारित संगीतमय नृत्य में मिथिला की लोक परंपराओं और पारिवारिक स्नेह को दर्शाया गया। पारंपरिक लोकनृत्य झिझिया की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। इन कार्यक्रमों के जरिए कलाकारों ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं और पर्व-त्योहारों की परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।
वीआईपी की मिमिक्री पर दर्शकों ने लगाए ठहाके
दशहरा महोत्सव में हास्य कलाकार वीआईपी की प्रस्तुति ने मनोरंजन का अलग रंग भर दिया। उन्होंने चुटीले व्यंग्य, हास्य संवाद और बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेताओं की आवाज की नकल से दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी मिमिक्री और संवाद अदायगी पर गांधी मैदान में बार-बार तालियां गूंजती रहीं। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शक मौजूद रहे। कलाकार की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया और दर्शकों ने हास्य कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शक मौजूद रहे। कलाकार की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया और दर्शकों ने हास्य कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों में बिहार की लोक संस्कृति, भक्ति, शास्त्रीय कला और आधुनिक मनोरंजन का मेल देखने को मिला। गांधी मैदान का मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ दर्शकों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बना।