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नवरात्र 2026: दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन लोकगीतों पर झूमे दर्शक, कॉमेडियन वीआईपी की मिमिक्री पर गूंजे ठहाके

Mon, 12 Oct 2026 09:22 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Patna News: पटना के गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन लोकगीतों, पारंपरिक नृत्य और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला। नीतू नवगीत ने छठ और मैथिली गीतों से समां बांधा, जबकि उषा सिंह और चाहत सिंह की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सामा-चकेवा और झिझिया नृत्य ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत दिखाई। वहीं, कॉमेडियन वीआईपी की मिमिक्री पर गांधी मैदान ठहाकों से गूंज उठा।
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दशहरा महोत्सव में कलाकारों ने बांधा समा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पटना के गांधी मैदान में आयोजित दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को बिहार की लोक संस्कृति, भक्ति संगीत, शास्त्रीय नृत्य और हास्य प्रस्तुतियों का रंग देखने को मिला। कलाकारों ने लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों के जरिए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा, वहीं हास्य कलाकार वीआईपी की मिमिक्री ने दर्शकों को खूब हंसाया। कार्यक्रम के दौरान गांधी मैदान तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग और पटना प्रमंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में लोकगीतों से लेकर बॉलीवुड अभिनेताओं की आवाज की नकल तक, मनोरंजन के कई रंग देखने को मिले। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

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बिहार गौरव गाथा से हुई सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मगध संगीत संस्थान के कलाकारों ने बिहार गौरव गाथा पर आधारित भावनृत्य से की। ‘महका-महका सोंधी माटी का बिहार है...’ गीत के माध्यम से कलाकारों ने बिहार की ऐतिहासिक विरासत, त्योहारों और लोक परंपराओं को प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में राज्य की सांस्कृतिक पहचान और अपनी मिट्टी से जुड़ाव को दर्शाया गया। इसके बाद लोक गायिका नीतू नवगीत ने छठ गीत ‘मांगे ला हम वरदान हे गंगा मइया’ और मैथिली लोकगीत ‘राम लगिहे पाहुनवां’ की प्रस्तुति दी। उनके गीतों में बिहार की लोक संगीत परंपरा के अलग-अलग रंग नजर आए। गायिका उषा सिंह ने ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ और ‘कोयल बिनु बगिया ना शोभे राजा’ जैसे गीतों से संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा। वहीं, सिने कलाकार चाहत सिंह ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बनाया।
 

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दशहरा महोत्सव में कलाकारों ने बांधा समा। - फोटो : अमर उजाला
दुर्गा वंदना, सामा-चकेवा और झिझिया ने बिखेरे रंग
कला श्री समूह के कलाकारों ने दुर्गा वंदना पर आधारित शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से भक्ति और भारतीय शास्त्रीय कला का संगम देखने को मिला। सामा-चकेवा पर्व पर आधारित संगीतमय नृत्य में मिथिला की लोक परंपराओं और पारिवारिक स्नेह को दर्शाया गया। पारंपरिक लोकनृत्य झिझिया की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। इन कार्यक्रमों के जरिए कलाकारों ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं और पर्व-त्योहारों की परंपराओं को मंच पर जीवंत किया।

वीआईपी की मिमिक्री पर दर्शकों ने लगाए ठहाके
दशहरा महोत्सव में हास्य कलाकार वीआईपी की प्रस्तुति ने मनोरंजन का अलग रंग भर दिया। उन्होंने चुटीले व्यंग्य, हास्य संवाद और बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेताओं की आवाज की नकल से दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी मिमिक्री और संवाद अदायगी पर गांधी मैदान में बार-बार तालियां गूंजती रहीं। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शक मौजूद रहे। कलाकार की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया और दर्शकों ने हास्य कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों समेत अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शक मौजूद रहे। कलाकार की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया और दर्शकों ने हास्य कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। दशहरा महोत्सव के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों में बिहार की लोक संस्कृति, भक्ति, शास्त्रीय कला और आधुनिक मनोरंजन का मेल देखने को मिला। गांधी मैदान का मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ दर्शकों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बना।
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