बिहार पुलिस, एनआईए और अन्य जांच एजेंसियां पटना में हुए धमाकों की गुत्थी सुलझाने में लगी हुई हैं। इन धमाकों का पूरा सच अभी सामने भी नहीं आया है लेकिन भाजपा की ओर से इस पर आक्रामक राजनीति तेज कर दी गई है।
प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के नेता प्रेस वार्ताएं कर नीतीश सरकार पर नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। साथ ही भाजपा की ओर से यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि बिहार सरकार ने आईबी के 23 अक्तूबर के उस रिपोर्ट की अनदेखी की है जिसमें रैली के दौरान हमले की आशंका जताई गई थी।
हालांकि इस सबंध में सोमवार शाम की गए प्रेस वार्ता में राज्य के डीजीपी अभयानंद ने सफाई दी कि 23 अक्तूबर को आईबी की ओर से एक सामान्य रिपोर्ट प्राप्त हुई थी जिसमें कोई विशेष सूचना नहीं थी।
अस्थि कलश यात्रा
इस बीच बिहार प्रदेश भाजपा ने यह घोषणा की है कि पार्टी आगामी 31 अक्तूबर को पटेल जयंती के अवसर पर मृतकों के गांवों से उनकी अस्थि कलश यात्रा निकालेगी जो कि 5 नवंबर को पटना पहुंचेगी। इस बीच भाजपा ने भी हुंकार रैली में मारे गए लोगों के परिजनों को पार्टी कोष से पांच-पांच लाख देने की घोषणा की है। इसके पहले बिहार सरकार द्वारा भी ऐसी ही घोषणा की गई थी।
साथ ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने मृतकों को ‘शहीद’ करार देते हुए गांवों में उनकी मूर्ति स्थापित करने की भी घोषणा की है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे धमाकों के बहाने लंबे समय तक राजनीति करने के तहत उठाया गया कदम बता रहे हैं। भाजपा के इन पहलकदमियों पर वरिष्ठ पत्रकार सुरूर अहमद की टिप्पणी थी, ‘धमाकों से भाजपा को बैठे-बिठाए एक बडा मुद्दा मिल गया है। खासकर बिहार में पार्टी की पूरी कोशिश होगी कि इसे अगले आम चुनाव तक किसी-किसी रूप में जिंदा भी रखा जाए। शहीद का दर्जा देने की घोषणा और अस्थि कलश यात्राएं ऐसी ही कोशिशों का हिस्सा हैं। साथ ही भाजपा की यह भी कोशिश होगी कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए।’
साथ ही अस्थि कलश यात्रा के शुरूआत के लिए पटेल जयंती का चुनाव कर भी भाजपा एक प्रतीकात्मक संदेश देना चाहती है। भाजपा की राजनीति के कई सिरे लौह पुरूष पटेल से जुडे हुए हैं।
पार्टी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को हमेशा पार्टी द्वारा दूसरे लौह पुरूष के रूप में पेश किया जाता रहा। वर्तमान में नरेंद्र मोदी ने गुजरात में पटेल की विशाल प्रतिमा निर्माण के लिए देश के हर पंचायत से लोहा मांगा है। साथ ही रविवार की पटना रैली के दौरान मोदी को पटेल की प्रतिमा देकर ही सम्मानित किया गया था।
एक घायल एम्स रेफर
इधर पटना में भाजपा की रैली में घायल हुए लोगों में 44 का इलाज पीएमसीएच में किया जा रहा है। इनमें से पांच का आईसीयू, 24 का इमरजेंसी और 20 का इलाज सामान्य वार्ड में हो रह है। इस बीच सोमवार रात धमाकों में घायल समर आलम को मुख्यमंत्री के निर्देश पर एम्स दिल्ली रेफर कर दिया गया।
रविवार के धमाकों के चपेट में आने से समर की नस कट गई थी और उसी दिन देर रात उनकी वैसकुलर सर्जरी की गयी थी।
मोदी से निराश
इस बीच कुछ घायल बात-चीत के क्रम में जहां इस बात से निराश दिखे कि घटना के बाद नरेंद्र मोदी उनसे मिलने नहीं आए तो कुछ की शिकायत यह थी कि नीतीश कुमार मिलने तो आए लेकिन हाल-चाल नहीं पूछा।
यह पूछे जाने पर कि मोदी रैली के बाद मिलने नहीं आए, क्या आप इससे नाराज हैं; जहानाबाद जिले के रजनीश कुमार का कहना था, ‘मैं रैली में भी मोदी जी से मिलने को उत्सुक था। घायल होने के बाद ऐसा लगा था कि वे हमसे मिलने आएंगे लेकिन उनके नहीं आने पर हम निराश हैं।’
वहीं घायल दीपक कुमार की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अस्पताल आए लेकिन उनका हाल-चाल नहीं पूछा। लेकिन कैमूर जिले के एक दूसरे घायल नरेंद्र पाठक ने बताया कि रविवार देर रात जब नीतीश कुमार पीएमसीएच मिलने आए थे तो उन्होंने हाल-चाल पूछा था।
घायलों को मिला ‘दीवाली गिफ्ट’
सोमवार को कुछ घायल युवाओं को ‘दीवाली गिफ्ट’ भी मिला। जहानाबाद जिले के एक भाजपा नेता ने अपने क्षेत्र के घायल युवाओं के लिए नए जींस और टी-शर्ट भिजवाए।
नए कपडे पाने वाले एक घायल राहुल कुमार ने इसे उचित ठहराते हुए कहा, ‘धमाके में हमारे कपडे खून से लथपथ हो गए थे और फट भी गए थे। ऐसे में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद हमें घर लौटने के लिए कपडों की सख्त जरूरत थी।’