फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या बिहार में केवल अपराधी ही जीतते हैं, पढ़ें खास खबर?

विज्ञापन
विज्ञापन
सामान्य धारणा है कि बिहार में चुनाव, केवल अपराधियों के चुनाव होते हैं। यह सच है कि विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर अपराधी चुनाव लड़ते हैं और जीतते भी हैं।
विज्ञापन


वास्तविकता क्या है?
बिहार विधानसभा चुनाव के कई उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ अपराधिक मामले चल रहे हैं। साल 2010 के विधानसभा चुनाव में 36 फीसदी उम्मीदवार ऐसे थे, जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले लंबित थे।

चुने गए विधायकों में 58 फ़ीसदी विधायकों पर कोई न कोई आपराधिक मामला चल रहा था। इसमें सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे।
विज्ञापन

अपराधी जीतते भी हैं

इस मामले में स्थिति ज़्यादा नहीं बदली है। इस बार के चुनाव में जितने उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले चल रहे हैं, साल 2005 में उससे थोड़े कम उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ ऐसे मामले लंबित थे।

लेकिन यह स्थिति दूसरे राज्यों से बहुत अलग नहीं थी। पहले की तुलना में बिहार में चुनाव अब कहीं ज़्यादा शांतिपूर्ण होते हैं। साल 2010 के चुनाव में 58 फ़ीसदी मतदाताओं की यही राय थी।

धांधली नहीं होती है?

इसके अलावा 24 फीसदी मतदाताओं की राय थी कि चुनाव में धांधली नहीं होती है। केवल 8 फ़ीसदी मतदाताओं का मानना था कि विधानसभा चुनाव में पहले की तुलना में ज़्यादा धांधली हुई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें