बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास की उम्र 93 साल है। वे संभवतः बिहार में लोकसभा के सबसे उम्रदराज उम्मीदवार हैं।
हाजीपुर से जनता दल यूनाइटेड के मौजूदा सांसद रामसुंदर दास को टक्कर दे रहे हैं लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान और कांग्रेस-राजद गठबंधन के संजीव टोनी।
बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी ने रामसुंदर दास से बात की।
कहा जा रहा है राजनीति से सीनियर लोगों को हट जाना चाहिए लेकिन आप अब भी उत्साह से लगे हुए हैं। लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
संदेश यह देना चाहते हैं कि यह पद सेवा का पद है। इस पद पर जो रहेगा वह रात-दिन लोगों के बीच रहेगा और सेवा की भावना से काम करेगा। मैं भी इसी भावना से प्रेरित होकर काम कर रहा हूं।
उम्र की बंदिश आपको मालूम पड रही है? नहीं न। क्योंकि उम्र की कोई बंदिश नहीं है। आदमी की उम्र नहीं उसकी उपलब्धि देखनी चाहिए। आप हमारा काम देख लीजिए।
भाजपा से गठबंधन टूटने का कोई असर पडेगा इन चुनावों में?
बिहार में शहरी क्षेत्र में शायद आपको दिखाई दे लेकिन देहाती इलाके में कोई उनका नाम भी नहीं जानता है। और यह जो हैं गठबंधन के उम्मीदवार, उन्हें देख लीजिए।
हम लोग सारे जिले में एक बार चक्कर लगा चुके हैं, मीटिंग कर चुके हैं। उन लोगों को तो देखा ही नहीं- कहां हैं, क्या कर रहे हैं।
कहीं यह व्यक्तियों का संघर्ष तो नहीं था, नीतीश कुमार बनाम नरेंद्र मोदी?
नीतीश ने जो किया अपनी नीति के अनुसार ही किया।
उन्होंने कहा है कि सांप्रदायिक लोगों से हम मरते दम तक कोई संबंध नहीं रखेंगे।
लेकिन शरद यादव का कहना था कि वह नहीं चाहते थे कि गठबंधन टूटे।
उनका कहना उचित है। हम नहीं चाहते थे कि गठबंधन टूटे, लेकिन जब उनका रास्ता बदलने लगा तो हमें यह फैसला लेना पडा।
चुनाव के बाद सरकार गठन में क्या भूमिका होगी जनता दल यूनाएटेड की?
वह तो मैंने आपको बता दिया कि समतामूलक समाज को आगे बढाने में हम कोई कमी नहीं छोडेंगे। समान विचारों वाली पार्टियों से बात भी चल रही है लेकिन चुनाव साबित करेगा कि कैसी सरकार होगी, कैसी चलेगी।