पटना हाइकोर्ट के सामने एक अजीब मामला आया है। एक औरत ने कोर्ट को याचिका देकर न्याय की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसने एक लड़के को जन्म दिया है जबकि उसे अस्पताल द्वारा एक लड़की दी जा रही है।
याचिकाकर्ता सोनी देवी ने पिछले साल दिसंबर में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि एमजीएम हॉस्पिटल में उनके बेटे को किसी बच्ची के साथ बदल दिया गया है। बच्चे को जन्म के बाद इलाज के लिए इसी हॉस्पिटल में रखा गया था।
याचिकाकर्ता के मुताबिक अक्तूबर 17, 2013 में पोलो हॉस्पिटल में उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया। उसको चंद्रप्रभा चाइल्डकेयर सेंटर भेज दिया गया क्योंकि उसकी तबियत जन्म देने के बाद ही से खराब थी।
वहां से बच्चे को एमजीएम हॉस्पिटल भेजा गया जहां वो पांच नवंबर तक रहा। डिस्चार्ज वाले दिन उसको एक लड़की दी गई और कहा गया कि यही उसका बच्चा है। उन्होंने जब इस बात का विरोध किया तो उन्हें वहां से भगा दिया गया।
सोनी और उनके पति सनी प्रसाद केसरी ने पांच नवंबर को ही पुलिस में मामला दर्ज करा दिया और बच्ची को लेने से इंकार कर दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में एक बर्थ सर्टिफिकेट उपलब्ध कराया जो उनको पोलो हॉस्पिटल ने दिया था। उसमें लिखा है कि सोनी ने जिस बच्चे को जन्म दिया है वह बच्चा एक लड़का है। जबकि जो रसीद एमजीएम हॉस्पिटल ने उनको दी उसमें केवल यहा लिखा है- बेबी ऑफ सोनी देवी।
इस मामले में जांच जारी है और इस मामले में कोर्ट में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।