भारतीय जनता पार्टी से नाता खत्म करने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यू के शीर्ष नेता नीतीश कुमार ने बुधवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया। नीतीश ने इस मौके पर अपनी 16 साल पुरानी दोस्त भाजपा को खूब खरी-खोटी सुनाई।
दूसरी तरफ, भाजपा ने इस विश्वास मत पर मतदान का बहिष्कार किया। विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से पेश विश्वास मत के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रतिपक्ष के नेता नंद किशोर यादव ने कहा कि नीतीश सरकार ने कांग्रेस की 'जुगाड़ तकनीक' से बहुमत जुटा लिया है। इसलिए सदन में इस पर मतदान की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने नीतीश कुमार पर दोहरा मापदंड अपनाने और सुविधा की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और बिहार की जनता को उम्मीद थी कि नीतीश कुमार पहले एनडीए के नेता और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते और फिर जद यू विधायक दल का नेता बनकर दोबारा मुख्यमंत्री पद संभालते।
नीतीश कुमार के लिए यह बेहद आसान जीत रही। सरकार के पक्ष में 126 वोट पड़े। उन्हें उम्मीद से 4 वोट ज्यादा मिले। सरकार के विरोध में केवल 24 वोट पड़े, क्योंकि भाजपा ने इस वोटिंग से अलग रहने का फैसला किया।
कांग्रेस विधायकों ने दिया नीतीश का साथ
विश्वास मत के दौरान कांग्रेस के सभी चार विधायकों ने नीतीश सरकार के पक्ष में मतदान कर इस नए राजनीतिक समीकरण के साफ संकेत दे दिए। हालांकि जदयू अध्यक्ष शरद यादव का कहना है कि पार्टी में नए विकल्पों पर चर्चा नहीं हुई है। फिलहाल दोनों दल अलग-अलग रास्ते पर हैं।
कुमार ने नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, 'हम चाहते हैं कि कोई धर्मनिरपेक्ष नेता देश की अगुवाई करे। ऐसा शख्स जो पिछड़े इलाकों की चिंता करे।'
इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा के विधायकों ने जय श्री राम और नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाए।
बिहार में बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति में आज विधानसभा का नजारा भी बदला हुआ था। पिछले सत्र तक सत्तापक्ष के साथ सदन में बैठने वाली भाजपा के विधायक अब मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। प्रतिपक्ष के नेता का पद भी अब राष्ट्रीय जनता दल की बजाए भाजपा के पास है।
गौरतलब है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जदयू के 118 विधायक है और उसे बहुमत का जादुई आंकड़ 122 प्राप्त करने के लिए मात्र चार विधायकों की ही जरूरत थी। विधानसभा में भाजपा के 91, राष्ट्रीय जनता दल के 22, कांग्रेस के 4, लोक जनशक्ति पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक-एक और 6 निर्दलीय विधायक है।
निर्दलीय विधायकों में से ओबरा के सोमप्रकाश, लौरिया के विनय बिहारी, ढाका के पवन कुमार जायसवाल और बलरामपुर के दुलालचंद गोस्वामी ने नीतीश सरकार को समर्थन देने की घोषणा पहले ही कर दी थी।