बिहार के पुलिस महानिदेशक, गुप्तेश्वर पांडेय
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बिहार के नालंदा में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के एक स्थानीय अनुसूचित जाति के नेता की पुलिस हिरासत में हुई मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) सख्त हो गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बिहार के डीजीपी गुप्तेशवर पांडेय को नोटिस भेजा है। आयोग ने छह सप्ताह के भीतर डीजीपी से जवाब मांगा है।
हिरासत में मौत पर तीन पुलिसकर्मी गिरफ्तार
बता दें कि 11 जुलाई को बिहार में नालंदा जिले के नगरनौसा थाना में एक लड़की के अपहरण मामले में गिरफ्तार किये गये जदयू के स्थानीय दलित नेता हिरासत के दौरान की मौत हो गई थी। इस मामले में तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के नगरनौसा थाना अंतर्गत सैदपुरा गांव निवासी व जदयू महादलित प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष गणेश रविदास 45 का शव हाजत के बगल वाले कमरे के पास बने शौचालय की खिड़की से लगे फंदे से पाया गया था । रविदास को पुलिस एक लड़की के अपहरण के मामले में पूछताछ के लिए थाना लायी थी।
इस घटना से आक्रोशित लागों ने आरोप लगाया है कि गणेश रविदास के सिर पर मौजूद गहरे चोट के निशान पुलिस द्वारा उसके साथ की गयी सख्ती को स्वयं बयान कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रविदास ने उस लड़की को अपने प्रेमी के साथ शादी करने में मदद की थी। लड़की किसी दूसरी जगह शरण ली हुई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस लड़की के पिता के साथ मिली हुई थी और वह रविदास पर उसके ठिकाने के बारे में बताने को लेकर दबाव डाल रही थी।
इस बीच केंद्रीय प्रक्षेत्र के उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार ने नालंदा पहुंचकर मामले की जांच की और उनके निर्देश पर नगरनौसा थाना अध्यक्ष कमलेश कुमार, सहायक अवर निरीक्षक बलविंदर राय और चौकीदार संजय पासवान को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में मृतक के परिजनों ने तीनों गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया है।