बिहार में बाढ़ की स्थिति ने रविवार को गंभीर रुप धारण कर लिया। अभी तक बाढ़ से राज्य के नौ जिलों में चार लोगों की मौत ही चुकी है और करीब 18 लाख लोग इससे प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल की सीमा से लगे क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश से राज्य की पांच नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया। वहीं सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के सांसदों ने विधानसभा परिसर में हंगामा और प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बाढ़ से हुई कुल चार मौतों में से अररिया के दो लोग जबकि शिवहर और किशनगंज के एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। राज्य के नौ जिलों-शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के 55 प्रखंडों में बाढ़ से कुल 17,96,535 आबादी प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बिहार का सीतामढ़ी जिला हुआ है। यहां करीब 11 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद अररिया जिला जहां पांच लाख लोग बाढ़ का प्रकोप झेल रहे हैं।
बाढ़ से प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान चलाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के 13 दलों को तैनात किया गया हैं। प्रशासन ने 45,053 लोगों को शरण देने के लिए 152 राहत शिविर खोले हैं जबकि 251 सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की गयी है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत शिविरों में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए समुचित व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए है। बाद में उन्होंने दरभंगा, मधुबनी, शिवहर, सीमामढ़ी और पूर्वी चंपारण जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया।
नेपाल के तराई क्षेत्र में पिछले तीन चार दिनों से 280 से 300 मिलीमीटर बारिश हो रही है जबकि पिछले साल 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। लगातार बारिश से राज्य में पांच नदियां बागमती, कमला बालन, लालबकया, अधवारा और महानंदा कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। पटना के मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले चार दिनों में कई जगहों पर बारिश का अनुमान जाहिर किया है।