"कुछ तो सुधार होता नहीं है। क्या नेता....क्या वोटिंग। कुछो एक्साइटमेंट नइखे।" ये कहना है बीकॉम की पढ़ाई कर रही प्रगति का जो बिहार विधानसभा चुनावों में अपने जीवन में पहली बार वोट डालेंगी।
प्रगति हालांकि अभी 20 साल की हैं, लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने वोट नहीं डाला था। इस बार भी वो मतदान को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिखती। पिछली बार वोट क्यों नहीं डाला था, पूछने पर कहती हैं, “हमारे यहां मम्मी पापा के अलावा कोई वोट नहीं डालता।”
लड़कियों की सुरक्षा-शिक्षा मुद्दा
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार तकरीबन 24 लाख नए वोटर हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में उनकी दिलचस्पी कम दिख रही है। बिहार की राजधानी पटना चुनावी पोस्टरों से पटी पड़ी है।
राजनीतिक गाने रिक्शे पर सवार होकर लाउडस्पीकर के जरिए पटना की गली-गली घूम रहे हैं। लेकिन पटना के कॉलेज की छात्राओं से जब चुनाव के बारे में पूछिए तो वो उल्टा आप ही से पूछेंगी, "कौन से चुनाव होने है?"
लेकिन कुछ लड़कियां ऐसी भी हैं, जिनके लिए पहली बार वोट देना बहुत रोमांचित करने वाला है। सूफिया उनमें से एक हैं। अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई कर रही सूफिया अपनी तस्वीर खींचने की इजाजत नहीं देती, लेकिन चुनाव पर खुलकर बात करती हैं।
सूफिया कहती हैं, "मैं विकास, शिक्षा और लड़कियों की सुरक्षा के मुददे पर वोट करूंगी। मेरे नेता में इन तीनों चीजों को लेकर क्लियर विज़न होना चाहिए।" वहीं 18 साल की मधु कहती है, "ये पहली बार है जब मैं वोट करूंगी। घर में सबको देखा है वोट करते हुए। अबकी बार खुद दूंगी और वो रोमांच मुझे अभी से ही महसूस हो रहा है।"
'पापा जहां कहेंगे, हम वोट डाल देंगे'
इन नए मतदाताओं की उम्मीदें भी अलग-अलग हैं। 18 साल की शीतल कहती है, "हमें तो वैसा नेता चाहिए जो पापा-मम्मी को समझाए कि लड़का और लड़की में कोई अंतर नहीं होता।" शीतल की सहेली श्वेता कहती हैं, "हमको कुछ समझ में नहीं आता।
मेरी नजर में सब नेता झूठे हैं। जो कहते हैं वो करते नहीं। इसलिए पापा जहां कहेंगे, हम वोट डाल देंगे।" इन सबके बीच समाजशास्त्र की पढ़ाई कर रहीं 20 साल की सोनम को ये बात अखरती है कि उन्होंने अब तक वोट नहीं डाला।
सोनम बताती हैं कि उन्होंने इस बार वोटर कार्ड भी बनवाया है। आपको कैसा नेता चाहिए, इस सवाल पर वो कहती है, "मुझे 'नायक' जैसा नेता चाहिए। पढ़ा-लिखा, स्मार्ट और जो फैसला आन द स्पॉट करे।"