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धरतीपकड़ का निधन: कंधे पर बड़े झोले में रिश्तों के लिए बायोडाटा रखते थे; चुनाव लड़ना छोड़ा, समाज को नहीं

Thu, 03 Sep 2026 06:52 PM IST
भागलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर

सार

Dharti Pakad Death: चुनावी मैदान में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाले ‘धरतीपकड़’ नागरमल बाजोरिया ने जीवन के अंतिम दौर में खुद को समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। गरीब बेटियों के विवाह, बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए उनका अहम योगदान बताया जाता है।
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नागरमल बाजोरिया का देहांत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हर चुनाव लड़ने वाले ‘धरतीपकड़’ के नाम से मशहूर नागरमल बाजोरिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को पटना में उनका निधन हो गया। वर्षों तक लोकतंत्र के हर चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले बाजोरिया ने जीवन के अंतिम दौर में खुद को पूरी तरह समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
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चुनाव से समाज सेवा तक का अनोखा सफर
भागलपुर के नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ की सबसे अनोखी पहचान उनका गधा चुनाव चिन्ह था। वह जब भी चुनाव लड़ते, प्रचार और नामांकन के दौरान अपने साथ एक गधा जरूर रखते थे। गधा ही उनके चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाता था। धीरे-धीरे उनका यह अंदाज इतना मशहूर हुआ कि लोग उन्हें उनके नाम से ज्यादा ‘धरतीपकड़’ के नाम से पहचानने लगे। चुनावी मैदान में लगातार हार के बावजूद गधे के साथ प्रचार करने की उनकी अनोखी शैली ने उन्हें आम नेताओं से अलग और लोगों के बीच बेहद चर्चित बना दिया।

2014 के बाद राजनीति से दूरी, सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
तकरीबन 2014 के बाद अस्वस्थ रहने के कारण उन्होंने सक्रिय रूप से चुनाव लड़ना बंद कर दिया। बाजोरिया के करीबियों की मानें तो इसके बाद उनका पूरा समय गरीबों की सेवा में बीतने लगा। गरीब बेटियों की शादी कराना, जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और असहाय परिवारों की मदद करना ही उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में हजारों गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग किया।
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झोले में रहता था लोगों की मदद का पूरा इंतजाम
नागरमल बाजोरिया जहां भी जाते थे, उनके कंधे पर एक बड़ा झोला जरूर रहता था। उस झोले में जरूरतमंद युवक-युवतियों के बायोडाटा रखे रहते थे। यदि रास्ते में कोई उनसे बेटी या बेटे की शादी की बात कह देता तो वे तुरंत झोले से बायोडाटा निकालकर रिश्ता जोड़ने की कोशिश शुरू कर देते थे। लोगों की मदद करने का उनका यही अंदाज उन्हें सबसे अलग बनाता था।

निधन की खबर से भागलपुर में शोक की लहर
उनके निधन की खबर मिलते ही भागलपुर में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा समाजसेवी नहीं देखा, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर दिया हो। लोगों के अनुसार, नागरमल बाजोरिया केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सेवा और मानवता की मिसाल थे।

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आज अंतिम दर्शन, शुक्रवार को होगा अंतिम संस्कार
नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम भागलपुर स्थित एमपी त्रिवेदी रोड स्थित उनके आवास लाया जाएगा, जहां लोग अंतिम दर्शन कर सकेंगे। शुक्रवार सुबह आठ बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से भागलपुर ने अपनी एक ऐसी पहचान खो दी है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
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