बिहार शिक्षा विभाग के आदेश ने बाद जहां एक तरफ छात्र-छात्राओं को थोड़ी राहत दी। वहीं, दूसरी ओर यह आदेश शिक्षकों के लिए अभी भी परेशानियों का सबब बना हुआ है। शिक्षक प्रतिदिन छह बजे विद्यालय जा रहे हैं और 12 बजे लौट रहे हैं। ऐसे शिक्षक बेचारे बुरी तरह से परेशान हैं। बताया जा रहा है कि हालत यह है कि कोई भी शिक्षक अपर मुख्य सचिव केके पाठक के विरोध में सामने नहीं आना चाहता। शिक्षक घुट-घुट कर परेशानी झेल रहे हैं।
दरअसल, पश्चिम चंपारण जिला गर्मी और लू की चपेट में है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री रहा। जिले के विभिन्न स्कूलों में छह से अधिक शिक्षक और शिक्षिका स्कूल में ही बेहोश होकर गिर पड़े। हालांकि अन्य शिक्षकों द्वारा स्थानीय स्तर पर इलाज करने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। शिक्षा विभाग पर यह सवाल उठता है कि क्या यह भीषण गर्मी सिर्फ बच्चों के लिए ही है। शिक्षक और शिक्षिकाओं के लिए नहीं। जिले की कई शिक्षिकाएं भी अपने साथ दो माह, चार माह, छह माह और एक साल के बच्चे को अपने साथ लेकर अपनी ड्यूटी पर आती हैं। क्या उन बच्चों और माताओं को गर्मी नहीं लगती।
नरकटियागंज बीआरसी में चहक प्रशिक्षण के दौरान कन्या मध्य विधालय के शिक्षिका असगरी बेगम और प्राथमिक विधालय बरवा के शिक्षक अनिल श्रीवास्तव हैं। दोनों लोगों को अन्य शिक्षकों द्वारा स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, जिसके बाद दोनों की तबीयत ठीक हुई। वहीं, चनपटिया युगल प्रसाद हाई स्कूल भैसहीं के शिक्षक रविरंजन कुमार बेहोश होकर बाइक से नीचे गिर गए। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोट आई है। घायल शिक्षक को परिजनों ने इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज किया गया।
उधर, बेतिया नगर के सिद्धौरा प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका सुषमा कुमारी और प्रीति वर्मा स्कूल आने के आधे घंटे के बाद बेहोश हो गईं। वहीं, योगापट्टी प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौमुखा शेरा टोला के शिक्षक विक्की कुमार स्कूल में ही मूर्छित होकर गिर गए। हालांकि अन्य शिक्षकों द्वारा उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया।
गौरतलब है कि बुधवार को भीषण गर्मी के कारण पश्चिम चंपारण जिले के विभिन्न प्रखंड में करीब एक दर्जन स्कूलों में दो दर्जन से अधिक बच्चे और शिक्षक-शिक्षिकाएं बेहोश हो गए थे। हालांकि इस तरह के मामले पश्चिम चंपारण जिले के अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी देखे गए थे। उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर 30 मई से आठ जून तक विद्यालय बंद करने का निर्देश जारी किया गया था। लेकिन इस बीच शिक्षकों का स्कूल में रहना अनिवार्य कर दिया गया है।
इस बावत नरकटियागंज प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कृष्णा कुमारी ने बताया कि विभागीय आदेश पर बीआरसी परिसर में चहक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। प्रशिक्षण को सफल बनाने की जिम्मेवारी बीआरसी को मिली है। प्रशिक्षण में पहुंचे वर्ग एक के शिक्षकों को प्रशिक्षित करना था। ताकि शिक्षक बच्चों को खेल-खेल में पढ़ा सकें।
दरअसल, प्रशिक्षण में कुल 47 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया था। उनमें से दो शिक्षक भीषण गर्मी के कारण बीमार हो गए। उन्होंने बताया कि गर्मी में बिजली नहीं रहने के कारण प्रशिक्षण में आए शिक्षक-शिक्षिका की तबीयत बिगड़ गई। हालांकि उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज करने के बाद घर भेज दिया गया है।