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अमर उजाला की खबर का असर: 44 दिन लापता रही युवती का शव मिलने के बाद हरकत में आई पुलिस, दो SHO पर गिरी गाज

Sat, 12 Jul 2025 01:38 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

Vaishali News: एसपी ने कहा कि यह पुलिस की गंभीर लापरवाही का मामला है। उन्होंने गोरौल थाना अध्यक्ष रोशन कुमार को निलंबित कर दिया है, जबकि भगवानपुर थाना अध्यक्ष शंभू प्रसाद के निलंबन की संस्तुति डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा को भेज दी गई है।
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पुलिस पर एफआईआर लिखने पर हीलाहवाली करने का आरोप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैशाली जिले में 44 दिन से लापता युवती के मामले में पुलिस की घोर लापरवाही पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। अमर उजाला द्वारा इस गंभीर मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। खबर प्रकाशित होने के बाद एसपी ललित मोहन शर्मा ने गोरौल थाना अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं भगवानपुर थाना अध्यक्ष के निलंबन का प्रस्ताव डीआईजी को भेजा गया है।

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अमर उजाला ने खोली लापरवाह व्यवस्था की परतें
मामले की शुरुआत 27 मई से होती है, जब पीरापुर गांव निवासी बीरचंद्र सिंह की 20 वर्षीय पुत्री संजना कुमारी कॉलेज के लिए निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने भगवानपुर थाना में अपहरण की आशंका जताते हुए शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया। उल्टा गोरौल और भगवानपुर थानों के बीच मामला उलझा दिया गया, एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।

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अमर उजाला ने जब इस मामले को उजागर किया तो सामने आया कि पुलिस ने न सिर्फ एफआईआर दर्ज करने से मना किया, बल्कि परिजनों को थानों के चक्कर लगवाते रहे। अदालत के हस्तक्षेप के बाद भी कार्रवाई में हीलाहवाली होती रही और अंततः 44 दिन बाद युवती का शव मकई के खेत से बरामद हुआ।
 
गोरौल थाना अध्यक्ष निलंबित, भगवानपुर थाना प्रभारी पर कार्रवाई की तैयारी
एसपी ललित मोहन शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि यह पुलिस की गंभीर लापरवाही का मामला है। उन्होंने गोरौल थाना अध्यक्ष रोशन कुमार को निलंबित कर दिया है, जबकि भगवानपुर थाना अध्यक्ष शंभू प्रसाद के निलंबन की संस्तुति डीआईजी चंदन कुमार कुशवाहा को भेज दी गई है। एसपी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को देश के किसी भी थाने में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज करवाने का अधिकार है। ऐसे में थानाध्यक्ष का प्राथमिकी दर्ज न करना पूरी तरह से गलत और गैर-कानूनी है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवानपुर पुलिस ने शव मिलने के बाद ही एफआईआर दर्ज की, जो कि गंभीर प्रक्रिया दोष है। साथ ही अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई, जो सेवा शर्तों का उल्लंघन है।
 
अदालत से निर्देश के बावजूद दर्ज नहीं की गई एफआईआर
स्वजनों ने जब थाने से न्याय नहीं मिला, तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने भगवानपुर थाने को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, लेकिन इसके बावजूद पुलिस टालमटोल करती रही। आखिरकार जब शव बरामद हुआ तब जाकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। इस बीच परिजन पूरी तरह से न्याय के लिए भटकते रहे।
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क्या है जीरो एफआईआर और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
एसपी ललित मोहन शर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी थाने में अपराध से संबंधित शिकायत देकर जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है। बाद में उस एफआईआर को संबंधित थाने में ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन थाना प्रभारियों की अज्ञानता अथवा लापरवाही के चलते यह प्रक्रिया भी ठप रही।

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