बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड की रामपुर श्यामचंद पंचायत में हुआ नाव हादसा सिर्फ एक गांव की त्रासदी बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। हादसे की गंभीरता का अंदाजा घटनास्थल तक पहुंचने वाले रास्ते से ही लगने लगता था। हाजीपुर से बिदुपुर होते हुए सिक्सलेन पुल की ओर से आने वाले लोग हों या पटना की तरफ से पहुंचने वाले, घटनास्थल से करीब 10 किलोमीटर पहले ही उन्हें हादसे की जानकारी मिलने लगती थी।
न गूगल मैप की जरूरत, न किसी से रास्ता पूछने की मजबूरी
इस हादसे के बाद घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बताने के लिए न तो गूगल मैप खोलने की जरूरत पड़ रही थी और न ही किसी से पूछताछ करनी पड़ रही थी। जैसे ही किसी गाड़ी की रफ्तार धीमी होती, स्थानीय लोग खुद आगे बढ़कर बताने लगते कि नाव हादसा किस दिशा में हुआ है और वहां तक पहुंचने के लिए किस रास्ते से जाना होगा।
गाड़ी धीमी होते ही रास्ता बताने लगते थे स्थानीय लोग
घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर तक लोगों का इस तरह रास्ता बताना दिखा रहा था कि हादसे की खबर पूरे इलाके में कितनी तेजी से फैल चुकी थी। सड़क के मोड़ों पर खड़े लोग आने-जाने वाली गाड़ियों पर नजर रख रहे थे। जैसे ही उन्हें लगता कि कोई हादसे वाली जगह जाना चाहता है, वे बिना पूछे ही उसे रास्ता बताने लगते थे। स्थानीय लोगों की इस सक्रियता से दूसरे इलाकों से आने वाले लोगों को घटनास्थल तक पहुंचने में आसानी हो रही थी। हादसे की चर्चा हर रास्ते और हर मोड़ पर सुनाई दे रही थी। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चिंता और दुख का माहौल था।
घटनास्थल की ओर दिनभर जारी रही लोगों की आवाजाही
नाव हादसे की खबर सुनकर आम लोग, स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और दूसरे इलाकों से आए लोग घटनास्थल की ओर पहुंच रहे थे। रास्ते में खड़े लोगों के लिए यह सिर्फ दिशा बताने का मामला नहीं था, बल्कि उनके बीच उस त्रासदी से जुड़ी जानकारी साझा करने की बेचैनी भी दिखाई दे रही थी, जिसने पूरे राघोपुर को शोक में डुबो दिया था। घटनास्थल की ओर दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही। हर तरफ हादसे की चर्चा हो रही थी और लोग मौके पर पहुंचकर हालात जानने की कोशिश कर रहे थे।
मौके पर जुटे 200 से अधिक मीडियाकर्मी और करीब 300 पुलिसकर्मी-पदाधिकारी
नाव हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी, प्रशासनिक पदाधिकारी और पुलिसकर्मी जुटे थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौके पर 200 से अधिक मीडियाकर्मी, करीब 100 प्रशासनिक पदाधिकारी और लगभग 200 पुलिसकर्मी मौजूद थे।
घटनास्थल पर इतनी बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी हादसे की गंभीरता और पूरे इलाके में फैली चिंता को दर्शा रही थी।