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Bihar News: कौनहारा घाट पर भूमि पूजन के दौरान यूजीसी सवाल पर मंत्री मौन, लगाने लगे भगवान के जयकारे

Fri, 23 Jan 2026 10:32 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

Vaishali News: हाजीपुर के कौनहारा घाट पर गजग्राह मूर्ति स्थापना के भूमि पूजन में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए। यूजीसी सवाल पर उन्होंने जवाब नहीं दिया और जयकारे लगाने लगे। मंत्री ने घाट की पौराणिक और धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
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केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय मीडिया से बात करते हुए - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित कौनहारा घाट पर गजग्राह की भव मूर्ति स्थापित करने के लिए शुक्रवार को भूमि पूजन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल होने हाजीपुर पहुंचे।

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पत्रकारों के सवाल पर नहीं मिला जवाब
कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने यूजीसी से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने सीधे उत्तर देने के बजाय भगवान की जय-जयकार लगाना शुरू कर दिया। इस पर मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया का ध्यान गया।
 
नगर परिषद और विधायक को दी बधाई
मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि हाजीपुर के कौनहारा घाट पर गजग्राह की मूर्ति स्थापित की जा रही है, इसके लिए नगर परिषद और स्थानीय विधायक बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि यह हाजीपुर के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आशा, उम्मीद और सपना था, जो अब पूरा हो रहा है।
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पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा कौनहारा घाट
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु स्वयं इस स्थल पर आए थे, जहां गज और ग्राह के बीच युद्ध हुआ था और ग्राह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। उन्होंने कहा कि इस घाट का उल्लेख ग्रंथों में भी मिलता है, जहां बताया गया है कि यह संघर्ष हजारों वर्षों तक चला था।
 
घाट की धार्मिक और सामाजिक मान्यता
बताया गया कि कौनहारा घाट की धरती कभी ठंडी नहीं होती, जहां 24 घंटे किसी न किसी चिता का दाह संस्कार चलता रहता है। दूर-दूर से लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने यहां आते हैं। संगम तट के पास बसे इस घाट को लेकर स्थानीय लोग बताते हैं कि वे यहां पूर्वजों के जमाने से रह रहे हैं।
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स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह उत्तरायण नदी का तट है और काशी व मथुरा के बाद इसी घाट पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस घाट पर कई प्रसिद्ध साधु-संतों और आचार्य किशोर कुणाल जैसे महापुरुषों का भी अंतिम संस्कार हो चुका है।

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