बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और अत्याचारों के खिलाफ बुधवार को मुजफ्फरपुर में हिंदू संगठनों ने विशाल मौन जुलूस निकाला। इस आयोजन में हजारों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए। क्लब मैदान से शुरू हुआ यह जुलूस पूरे शहर में घूमा, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा की मांग उठाई।
चिन्मय कृष्णदास की गिरफ्तारी का विरोध
जुलूस के दौरान इस्कॉन के स्वामी चिन्मय कृष्णदास ब्रह्मचारी की रिहाई की भी मांग की गई। चिन्मय कृष्णदास बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे, उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने इस गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए तीव्र विरोध दर्ज कराया।
भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपील
हिंदू संघर्ष समिति और अन्य संगठनों ने भारत सरकार से बांग्लादेश के हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। भाजपा नेता साकेत शुभम ने कहा कि बांग्लादेश के हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। भारत सरकार को इस मामले में कड़ा कदम उठाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो भारत बांग्लादेश को यह संदेश दे कि हिंदुओं की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है।
हिंदू समुदाय की एकता का प्रदर्शन
मौन जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर लेकर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। इस अवसर पर महिलाओं और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। हिंदू संगठनों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब हिंदू समाज जाग चुका है। अगर बांग्लादेश में अत्याचार बंद नहीं हुए, तो इसका असर भारत पर भी पड़ेगा।
बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बांग्लादेश में हिंदू समाज दशकों से धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहा है। वहां मंदिरों पर हमले, महिलाओं पर अत्याचार और संपत्ति की लूट जैसी घटनाएं आम हैं। उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
वहीं, हिंदू संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि अगर बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। भारत सरकार से यह भी अपील की गई कि बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बनाकर हिंदुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।