तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार वंशीधर ब्रजवासी की जीत ने इतिहास रच दिया है। बीते 25 वर्षों से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लगातार सीतामढ़ी के पास रहा था। लेकिन इस बार मुजफ्फरपुर के उम्मीदवार ने जीत दर्ज कर इस वर्चस्व को तोड़ते हुए क्षेत्रीय राजनीति में नई दिशा दी है।
सीतामढ़ी का दबदबा टूटा, मुजफ्फरपुर के उम्मीदवार का उदय
बीते ढाई दशकों तक यह निर्वाचन क्षेत्र सीतामढ़ी के प्रभाव में रहा। पूर्व सांसद देवेश चंद्र ठाकुर का राजनीतिक जादू लंबे समय तक इस क्षेत्र में कायम रहा। उन्होंने 22 वर्षों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, इस बार उनके समर्थन के बावजूद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अभिषेक झा को हार का सामना करना पड़ा।
वंशीधर ब्रजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए 23,003 वोटों के साथ जीत हासिल की। यह न केवल मुजफ्फरपुर के लिए एक ऐतिहासिक पल है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी बदलाव का प्रतीक है।
शीर्ष तीन उम्मीदवार मुजफ्फरपुर से
इस बार शीर्ष तीन उम्मीदवार मुजफ्फरपुर से रहे, जिनमें वंशीधर ब्रजवासी (निर्दलीय) को 23,003 वोट मिले, डॉ. विनायक गौतम (जन सुराज) को 12,467 वोट मिले और गोपी किशन (राजद) को 11,600 वोट मिले। लेकिन जेडीयू के अभिषेक झा चौथे स्थान पर रहे।
मतदान में गड़बड़ी और रद्द वोटों का सवाल
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में स्नातकों को वोट करने का अधिकार था। हालांकि, शिक्षित वर्ग के इस चुनाव में 6,843 वोट रद्द कर दिए गए। यह संख्या इतनी बड़ी थी कि इससे जुड़े सवाल उठने लगे हैं।
रद्द वोटों का कारण:- वोटरों ने मतपत्र पर सही तरीके से वरीयता क्रम नहीं लिखा। कुछ वोटरों ने गलत तरीके से संदेश लिख दिए, जैसे ‘मैं अपना वोट आपको देता हूं’ या ‘दिल के साथ वोट भी देता हूं’। रद्द किए गए वोटों की संख्या चार उम्मीदवारों को मिले कुल वोट से भी अधिक थी।
वंशीधर ब्रजवासी का प्रभाव
वंशीधर ब्रजवासी मल्लाह समाज से आते हैं, जो क्षेत्र में एक प्रमुख जातीय समूह है। उनकी जीत इस समाज के लिए एक मजबूत राजनीतिक संकेत है। वे क्षेत्रीय नेता के रूप में उभरने का मौका पा सकते हैं।