श्मशान घाट में रोजाना 8 घंटे पढ़ाई करने वाली माही ने मैट्रिक में हासिल किए 90.8 प्रतिशत
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बिहार के मुजफ्फरपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हर किसी का दिल छू लेगी। जहां लोग आमतौर पर केवल अंतिम विदाई देने के लिए जाते हैं। उसी श्मशान घाट में मुजफ्फरपुर में पढ़कर माही कुमारी ने बिहार बोर्ड मैट्रिक 2026 में 454 अंक लाकर परिवार का नाम रोशन किया है।
श्मशान घाट में होती थी पढ़ाई
मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्थित मुक्ति धाम में शिक्षक सुमित कुमार की अगुवाई में अप्पन पाठशाला नाम से एक अनोखी स्कूल चलती है। यहां श्मशान घाट के पास रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को पढ़ाया जाता है। माही तीसरी कक्षा से यहां पढ़ रही थी यानी पिछले सात वर्षों से वह इसी पाठशाला में पढ़ाई करती आई है। इस वर्ष माही के साथ निशा ने भी मैट्रिक की परीक्षा दी और दोनों ने पहली श्रेणी में सफलता हासिल की।
माही रोजाना 8-10 घंटे करती थी पढ़ाई
माही ने बताया कि वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी और प्रतिदिन पाठशाला आकर अपनी तैयारी करती थी। उनका कहना है कि पढ़ाई और लक्ष्य के प्रति सच्चा समर्पण ही किसी भी मुकाम को आसान बना देता है। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय शिक्षक सुमित कुमार और अपने माता-पिता को दिया।
सब्जी बेचते हैं पिता
माही के पिता गरीबनाथ साहनी सब्जी बेचने का काम करते हैं और मां सुनैना देवी मजदूरी करती हैं। इतनी कठिन परिस्थितियों में भी परिवार ने माही की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। माही का सपना आगे पढ़कर सिविल सर्विसेज में जाना और देश की सेवा करना है।
पिता की आंखों में आए आंसू
माही के पिता ने कहा कि बेटी के इस परिणाम ने पूरे परिवार को एक नई जान और ताजी उम्मीद दे दी है। कठिन हालात में भी बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि अब माही जो भी बनना चाहेगी हम पूरी ताकत से उसका साथ देंगे।
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शिक्षक बोले - यह पल अद्भुत और प्रेरणादायक
शिक्षक सुमित कुमार ने बताया कि पिछले साल तीन छात्राएं पास हुई थीं और इस बार दो और बच्चियों ने परचम लहराया। उनका लक्ष्य श्मशान घाट के आसपास रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा की रोशनी देना है और आज उनकी पाठशाला की बेटियों की यह कामयाबी उनके संकल्प को और मजबूत कर गई है।