एयरफोर्स सार्जेंट को दी गई श्रद्धांजलि
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मुजफ्फरपुर जिले के एयरफोर्स जवान सार्जेंट प्रशांत शेखर की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद सोमवार को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ उनके गांव पहुंचा। जैसे ही शहीद जवान का शव गांव पहुंचा, पूरा गांव गमगीन हो गया और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। भारतीय वायु सेना के जवानों ने दरभंगा से शव लाकर पूरे सम्मान के साथ उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। गांव के लोगों ने भाव-विभोर होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
15 साल पहले ज्वाइन की थी एयरफोर्स
बताया जाता है कि सार्जेंट प्रशांत शेखर ने करीब 15 वर्ष पहले भारतीय वायु सेना ज्वाइन की थी। 33 वर्षीय प्रशांत शेखर असम के तेजपुर स्थित एयरफोर्स सेंटर में पोस्टेड थे। इसी दौरान वह बीमार पड़ गए थे और उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब
भारतीय वायु सेना के जवान की इलाज के दौरान मौत के बाद उनका पार्थिव शरीर असम से दरभंगा लाया गया। इसके बाद एयरफोर्स के जवानों द्वारा पूरे सम्मान के साथ उनके शव को उनके गांव पहुंचाया गया। गांव में शव पहुंचते ही परिजनों में चीत्कार मच गया और पूरे गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।
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पिता ने बताया बेटे को था देश सेवा का जुनून
शहीद जवान के पिता मदन मुरारी सिंह ने बताया कि प्रशांत शेखर की बेहद कम उम्र में मौत हो गई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को देश सेवा का जुनून था। कुछ दिन पहले ही वह ड्यूटी के दौरान बीमार पड़ गए थे और अपने कैंप में ही एयरफोर्स के डॉक्टरों द्वारा उनका इलाज किया जा रहा था। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई।
तीन साल पहले हुई थी शादी
परिजनों ने बताया कि प्रशांत शेखर की शादी तीन वर्ष पहले ही हुई थी। आज जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो ऐसा लग रहा है जैसे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिवार में मायूसी छा गई है। गांव के लोगों ने भी नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और श्रद्धांजलि अर्पित की।